रायगढ़

सत्ता, सट्टा और ‘सफेदपोश’: रायगढ़ में सट्टा किंग करण अग्रवाल की गिरफ्तारी से बेनकाब हुआ भाजपा-RSS का ‘संरक्षण तंत्र’…

रायगढ़। शहर में ऑनलाइन सट्टेबाजी के सरगना करण अग्रवाल की गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ की सियासत में जबरदस्त भूचाल ला दिया है। यह कार्रवाई सिर्फ एक सटोरिए के पकड़े जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता के गलियारों और संघ की शाखाओं तक गहराई से फैले एक ‘अपवित्र गठजोड़’ का खुला पर्दाफाश है। ‘सुशासन’ का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ इस सट्टा किंग की मुस्कुराती तस्वीरें चीख-चीख कर गवाही दे रही हैं कि अपराधियों का असली ‘सुरक्षा कवच’ आखिर कौन है।

रायगढ़ जिला कांगेस द्वारा जारी प्रेस नोट

मंत्री ओ.पी. चौधरी की खोखली दलीलें और सटोरिए की ‘अंदरूनी पैठ’ – वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इस फजीहत से बचने के लिए जो दलील दी कि “सार्वजनिक जीवन में कोई भी फोटो खिंचवा लेता है”, वह महज एक हताश और सफेद झूठ है। करण अग्रवाल कोई राह चलता आम नागरिक नहीं था; वह भाजपा नेताओं के ड्राइंग रूम, बंद कमरों की बैठकों और निजी आयोजनों का वीआईपी मेहमान था।

  • अरुण धर दीवान (वर्तमान जिलाध्यक्ष) और उमेश अग्रवाल (पूर्व जिलाध्यक्ष) के साथ सटोरिए की तस्वीरें किसी औपचारिक मुलाकात की नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक संरक्षण की कहानी बयां करती हैं।
  • सुमित शर्मा (BJYM जिलाध्यक्ष) के साथ करण अग्रवाल की ‘जुगलबंदी’ पूरे रायगढ़ में चर्चा का विषय रही है। शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे पोस्टर इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि करण भाजपा के भीतर एक ‘अधिकृत कार्यकर्ता’ के रूप में स्थापित हो चुका था।

RSS के ‘चाल, चरित्र और चेहरे’ पर सबसे बड़ा सवाल – इस पूरे प्रकरण का सबसे चौंकाने वाला पहलू इस सट्टा किंग का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सीधा जुड़ाव है। जो संगठन राष्ट्रवाद, संस्कार और नैतिकता का पाठ पढ़ाने का दावा करता है, उसका एक प्रशिक्षित और सक्रिय सदस्य करोड़ों के सट्टा सिंडिकेट का ‘मास्टरमाइंड’ कैसे निकल गया? क्या संघ की शाखाओं में अब समाज सेवा की आड़ में सट्टेबाजी का ‘प्रशिक्षण’ चल रहा है? रमन सिंह से लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जैसे शीर्ष नेतृत्व के साथ इस अपराधी का खड़ा होना यह साबित करता है कि सट्टे का यह काला साम्राज्य ‘ऊपर के आशीर्वाद’ के बिना इतना फल-फूल ही नहीं सकता था।

पुलिस का एक्शन और घबराई हुई भाजपा – यह गिरफ्तारी भाजपा सरकार की तथाकथित ‘इच्छाशक्ति’ का नहीं, बल्कि रायगढ़ के नए एसएसपी शशि मोहन सिंह की सख्ती और कर्तव्यनिष्ठा का सीधा नतीजा है। जब यह सटोरिया सोशल मीडिया पर पुलिस को खुली चुनौती दे रहा था, तब सत्ताधारी नेता रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए थे। अब जब पुलिस ने इस सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है, तो भाजपा नेता अपराध बोध और हताशा से घिरकर अनर्गल बयानबाजी पर उतर आए हैं।

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सिर्फ मोहरों से काम नहीं चलेगा, उठ रही हैं ये 3 बड़ी मांगें: – सत्ता परिवर्तन के बाद अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो चुका है क्योंकि उन्हें पता है कि उनके ‘आका’ सत्ता की कुर्सी पर काबिज हैं। रायगढ़ की जनता अब आर-पार की जांच चाहती है:

  • कॉल रिकॉर्ड हों सार्वजनिक: BJYM जिलाध्यक्ष सुमित शर्मा और अन्य संलिप्त भाजपा नेताओं के पिछले छह महीने के कॉल डिटेल्स तुरंत सार्वजनिक किए जाएं।
  • चुनावी चंदे की हो जांच: भाजपा यह स्पष्ट करे कि क्या पिछले चुनावों के दौरान इस सट्टा सिंडिकेट से कोई चंदा या मोटा आर्थिक सहयोग लिया गया था?
  • नैतिक इस्तीफा: जब तक इस पूरे नेक्सस की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक तस्वीर में नजर आ रहे तमाम भाजपा नेताओं को उनके पदों से हटाया जाए।

​जब रक्षक ही भक्षक के साथ सेल्फी ले रहे हों, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? केवल एक मोहरे की गिरफ्तारी काफी नहीं है, सट्टे की इस काली कमाई से पलने वाले सफेदपोश आकाओं का गिरेबान भी पकड़ना होगा। तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं और भाजपा का दोहरा चरित्र अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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