लैलूंगा : 15वें वित्त आयोग के लाखों के कामों पर RTI का ‘हथौड़ा’, तीन पंचायतों से मांगा गया पाई-पाई का हिसाब!…

- बिना जियो-टैग और मस्टर रोल के कैसे हुआ भुगतान? आरटीआई में मांगी गई जानकारी, तो जनपद पंचायत में मची खलबली।…
लैलूंगा (रायगढ़): जमीनी स्तर पर विकास के लिए 15वें वित्त आयोग से आने वाली मोटी रकम का पंचायतों में किस तरह इस्तेमाल हो रहा है, इसकी पोल खोलने के लिए सूचना के अधिकार (RTI) का एक बड़ा मामला सामने आया है। लैलूंगा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली तीन ग्राम पंचायतों- केशला , कोडासिया और चोरंगा -के सचिवों से उनके कार्यकाल के दौरान हुए सभी निर्माण कार्यों का कच्चा-चिट्ठा मांग लिया गया है।
राजपुर (लैलूंगा) निवासी आरटीआई कार्यकर्ता श्री ऋषिकेश मिश्रा ने जनसूचना अधिकारी (ग्राम पंचायत सचिव) को आवेदन लगाकर 1 अप्रैल 2021 से लेकर अब तक 15वें वित्त आयोग के तहत हुए सभी कार्यों की ऐसी बारीक जानकारियां मांगी हैं, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों और सचिवों की नींद उड़ना तय है।
RTI में क्या-क्या मांगा गया? (जिससे फंसा पेंच) – अपीलार्थी ने केवल कागजी जानकारी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाले पुख्ता सबूत मांगे थे:
- माप पुस्तिका (MB) की प्रमाणित कॉपी: जिन पन्नों के आधार पर ठेकेदारों/मजदूरों को बिल का भुगतान हुआ है।
- जियो-टैग तस्वीरें: काम शुरू होने से पहले, काम के दौरान और काम खत्म होने के बाद की तस्वीरें (अक्षांश-देशांतर और तारीख सहित), जिन्हें पोर्टल पर अपलोड किया गया हो।
- मस्टर रोल की सत्यापित प्रति: यह साबित करने के लिए कि वास्तव में मानव श्रम (मजदूरों) का उपयोग हुआ है या नहीं।
सुनवाई में क्या हुआ? – जब सचिवों ने यह जानकारी नहीं दी, तो मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत लैलूंगा) के पास पहुंचा। 12 मई 2026 को इस मामले की सुनवाई रखी गई।
हैरानी की बात यह रही कि सुनवाई के दौरान तीनों पंचायतों (केशल, कोडासिया, चोरंगा) के जनसूचना अधिकारी तो मौजूद रहे, लेकिन अपीलार्थी ऋषिकेश मिश्रा खुद अनुपस्थित रहे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रथम अपील तक पहुंचने के बावजूद, सचिवों द्वारा अपीलार्थी को किसी भी प्रकार की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
क्या आया फैसला? – जनपद पंचायत लैलूंगा के प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 12 मई 2026 को अपना निर्णय पारित करते हुए एक ‘बीच का रास्ता’ निकाला है। आदेश में कहा गया है कि अपीलार्थी द्वारा मांगी गई जानकारी बहुत ‘विस्तृत’ है और उसमें स्पष्टता (विशिष्टिकरण) का अभाव है।
इसलिए जनसूचना अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर अपीलार्थी को बुलाकर संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन (Inspection) करवाएं और जनपद कार्यालय को सूचित करें।
अब देखना यह होगा: क्या अगले 15 दिनों में पंचायत सचिव 15वें वित्त आयोग की फाइलें आरटीआई कार्यकर्ता के सामने खोलेंगे? क्या जियो-टैग और मस्टर रोल में सब कुछ पारदर्शी मिलेगा, या फिर दस्तावेजों के अवलोकन के दौरान कोई बड़ा ‘खेल’ उजागर होगा? क्षेत्र की जनता की निगाहें अब इस मामले पर टिक गई हैं।
(नोट: यह खबर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत लैलूंगा द्वारा जारी आदेश क्रमांक 549 / दिनांक 13.05.2026 के आधार पर है।)




