खाकी फिर शर्मसार : SI ने शादी का झांसा देकर किया रेप, जबरन गर्भपात कराकर अश्लील वीडियो से किया ब्लैकमेल…

सक्ती। न्याय की रक्षा करने वाली खाकी एक बार फिर दागदार हुई है। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में एक महिला ने सब-इंस्पेक्टर (SI) पर यौन शोषण, धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि अधिकारी ने न केवल उसे धोखे में रखकर शारीरिक संबंध बनाए, बल्कि गर्भवती होने पर उसे धोखे से गर्भपात की दवा खिला दी।
दोस्ती से दरिंदगी तक की कहानी : पीड़ित महिला के अनुसार, उसकी मुलाकात SI से तब हुई थी जब वह दंतेवाड़ा में पदस्थ था। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह बातचीत धीरे-धीरे नजदीकियों में बदल गई। महिला का आरोप है कि:
- झूठ की बुनियाद : SI ने खुद को कुंवारा बताकर महिला को शादी का झांसा दिया, जबकि वह पहले से शादीशुदा था।
- यौन शोषण : शादी का भरोसा दिलाकर आरोपी ने महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए और चुपके से उसके न्यूड वीडियो व फोटो बना लिए।
- धोखे से गर्भपात : जनवरी 2024 में जब महिला गर्भवती हुई, तो SI ने उसे अपनाने का नाटक किया लेकिन धोखे से अबॉर्शन पिल (गर्भपात की दवा) खिला दी।
ब्लैकमेलिंग का घिनौना खेल : महिला ने आरोप लगाया है कि गर्भपात के बाद भी आरोपी उसका शोषण करता रहा। जब महिला ने विरोध किया, तो SI ने उसके निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
“उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। पहले प्यार का नाटक किया, फिर मेरे शरीर से खेला और अब वीडियो के दम पर मुझे डरा रहा है।” – पीड़ित महिला
मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं, महिला और उसका पति मिलकर मुझसे पैसे की मांग कर रहे थे, पैसा नही देने पर मेरे खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। – कमल मैरिषा SI, सक्ती

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल : हैरानी की बात यह है कि पीड़िता ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने अपने ही विभाग के अधिकारी को बचाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। न्याय न मिलता देख, अब महिला ने आईजी (IG) से गुहार लगाई है।
मुख्य बिंदु :
- स्थान : सक्ती जिला, छत्तीसगढ़।
- आरोपी : सब-इंस्पेक्टर (SI), जो पूर्व में दंतेवाड़ा में पदस्थ था।
- आरोप : रेप, धोखाधड़ी, जबरन गर्भपात और वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग।
- वर्तमान स्थिति : पुलिस के उच्च अधिकारियों तक मामला पहुँचने के बाद हड़कंप।
संपादकीय टिप्पणी : यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि रक्षक ही भक्षक बन जाए और विभाग उसे संरक्षण दे, तो आम जनता का कानून से विश्वास उठना लाजमी है। मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की दरकार है।




