छत्तीसगढ़ : 24 घंटे में ‘बैकफुट’ पर सरकार ; सरकारी यू-टर्न से मचा प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप… जाने पूरा मामला…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक मशीनरी में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो गई, जब सरकार ने अपने ही सख्त फरमान को महज 24 घंटे के भीतर ठंडे बस्ते में डाल दिया। सरकारी कर्मचारियों की ‘निष्ठा’ और ‘निष्पक्षता’ को लेकर जारी किया गया कड़ा आदेश अगले ही दिन ‘स्थगित’ कर दिया गया, जिसने अब सत्ता के गलियारों में चर्चाओं और सवालों का बाजार गर्म कर दिया है।
क्या था वो ‘सख्त’ आदेश? – 21 अप्रैल को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक पत्र जारी किया था, जिसने सरकारी महकमों में खलबली मचा दी थी। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का हवाला देते हुए शासन ने दो टूक कहा था कि :
- कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल या संगठन का सक्रिय सदस्य नहीं होगा।
- किसी भी राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी पूरी तरह वर्जित होगी।
- बिना अनुमति किसी भी संस्था या समिति में पद लेने पर पाबंदी होगी, ताकि प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहे।
- नियम तोड़ने वालों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
24 घंटे में ‘बैकफुट’ पर सरकार : हैरानी की बात यह रही कि जिस आदेश में “कठोर कार्रवाई” की चेतावनी दी गई थी, 22 अप्रैल की तारीख पड़ते ही उसकी धार कुंद कर दी गई। विभाग ने एक नया सर्कुलर जारी कर पुराने आदेश को “आगामी आदेश तक स्थगित” कर दिया।
बड़ा सवाल: आखिर 24 घंटे के भीतर ऐसा क्या दबाव या परिस्थिति बदली कि सरकार को अपने ही सुधारात्मक कदम से कदम पीछे खींचने पड़े?
चर्चाओं का बाजार गर्म: यू-टर्न की वजह क्या? – प्रशासनिक हलकों में इस ‘क्विक यू-टर्न’ को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं:
- संगठनों का दबाव : क्या कर्मचारी संगठनों या रसूखदार समितियों के दबाव में सरकार ने घुटने टेके?
- चुनावी या राजनीतिक समीकरण : क्या किसी खास वर्ग की नाराजगी मोल लेने के डर से यह फैसला वापस हुआ?
- समन्वय की कमी : क्या बिना पूरी तैयारी और उच्च स्तर पर राय-मशविरा किए इतना बड़ा आदेश जारी कर दिया गया था?
नियमों का पालन कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन एक ही दिन में आदेश जारी करना और फिर उसे स्थगित कर देना शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। अब देखना यह है कि यह ‘स्थगन’ केवल कुछ समय के लिए है या फिर ‘सिविल सेवा आचरण’ की फाइल दोबारा कभी खुलेगी ही नहीं।




