गजब की ‘प्रगति’ है साहब… लैलूंगा में अब कागजों से बुझेगी जनता की प्यास, नलों में पानी नहीं ‘तारीख’ आ रही है!…

रायगढ़। अगर आपको प्यास लगी है, तो लोटा लेकर नल के पास मत जाइए। उसके बजाय लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) का पत्र क्रमांक 2358 पढ़ लीजिए। यकीन मानिए, विभाग के तर्क इतने ‘ठंडे’ हैं कि आपकी प्यास अपने आप मर जाएगी।
रायगढ़ के ‘विद्वान’ इंजीनियरों ने एक नया चमत्कार कर दिखाया है। ग्राम बनकेला के ग्रामीणों ने जब कलेक्टर साहब से गुहार लगाई कि साहब, गला सूख रहा है, एक हैंडपंप लगवा दो, तो विभाग ने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया – “भविष्य में नल आएगा, इसलिए वर्तमान में पानी की जरूरत नहीं है।”

योजना ‘प्रगति’ पर है, जनता ‘दुर्गति’ पर! – विभाग का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत काम ‘प्रगति’ पर है। अब इस प्रगति की तस्वीर भी देख लीजिए (फोटो संलग्न है)। जमीन से एक लोहे का पाइप ऐसे बाहर झांक रहा है जैसे मंगल ग्रह से संपर्क करने का एंटीना हो। न हत्था है, न चेन है, और पानी? वह तो शायद ‘डिजिटल इंडिया’ के माध्यम से सीधे क्लाउड स्टोरेज में जमा हो रहा है।
विभाग की ‘दिव्य’ दृष्टि – कार्यपालन अभियंता साहब की दूरदर्शिता की दाद देनी होगी। उन्होंने शायद यह मान लिया है कि बनकेला के ग्रामीण ‘ऊंट’ प्रजाति के हैं, जो साल 2026 में किए गए वादे के पानी से साल 2028 तक अपना काम चला लेंगे। पत्र में बड़े गर्व से लिखा गया है— “अतिरिक्त नलकूप खनन की आवश्यकता नहीं है।” बिल्कुल सही बात है साहब! जब पाइप को पत्थर से ढंक कर रखने की कला विकसित हो ही गई है, तो पानी निकाल कर कीचड़ करने की क्या जरूरत?
कागजों पर बह रही है विकास की गंगा – ग्रामीणों को समझना चाहिए कि नल से पानी आना पुरानी बात हो गई है। अब तो ‘सिस्टम’ से जवाब आता है। विभाग ने कलेक्टर साहब को भी बड़े प्यार से लिख दिया है कि इस प्रकरण को ‘विलोपित’ (Delete) करने का कष्ट करें। यानी समस्या हल हुई या नहीं, फाइल बंद होनी चाहिए। आखिर फाइल का वजन कम होगा, तभी तो विकास की गाड़ी तेज दौड़ेगी!
संपादकीय टिप्पणी : धन्य है वह विभाग जो प्यासे को पानी नहीं, ‘प्रगतिरत कार्य’ का सर्टिफिकेट थमाता है। बनकेला के लोग अब इस पत्र को बाल्टी में डालकर हिला रहे हैं, शायद कागजों के अक्षरों से ही दो बूंद पानी टपक जाए।
चेतावनी : इस खबर को पढ़ते समय गले में खराश हो तो कृपया विभाग के पत्र को दो बार पढ़ें, राहत अवश्य मिलेगी।




