भ्रष्टाचार का ‘ब्लैक होल’ बनी सुखरी की सड़क : 228 लाख डकार गए जिम्मेदार, चंद महीनों में ही उधड़ गई विकास की चादर!…

अंबिकापुर। कहते हैं सड़कें विकास की भाग्यरेखा होती हैं, लेकिन अंबिकापुर के सुखरी क्षेत्र में विकास की यह रेखा भ्रष्टाचार के डामर से लिखी गई है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कोयला डुग्गू से राजभान सरपंच के घर तक बनी सड़क ने विभाग के इंजीनियरों और ठेकेदार की जुगलबंदी का ऐसा ‘घोटाला मॉडल’ पेश किया है, जिसे देख ग्रामीण दंग हैं।
करोड़ों की लागत, कौड़ियों का काम! – अक्टूबर 2023 में जब 2 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से इस 4 किलोमीटर की सड़क का काम शुरू हुआ, तो ग्रामीणों को लगा कि उनके अच्छे दिन आ गए। लेकिन उन्हें क्या पता था कि ठेकेदार और विभाग के ‘साहबों’ के लिए यह सड़क एक ‘दुधारू गाय’ बनने जा रही है।
- हालत-ए-सड़क : निर्माण खत्म होते ही सड़क ने जवाब दे दिया।
- दिखावे की मरम्मत : गड्ढे भरने के नाम पर खानापूर्ति की गई, लेकिन पहली बारिश और चंद गाड़ियों के गुजरते ही सड़क फिर से ‘खेत’ में तब्दील हो गई है।
इंजीनियर-ठेकेदार का ‘नेक्सस’ : जनता के टैक्स की लूट – ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह लीपा-पोती का खेल बिना अधिकारियों की शह के मुमकिन नहीं है। जब विभाग के जिम्मेदार इंजीनियर ही ठेकेदार के ‘मैनेजर’ बन जाएं, तो गुणवत्ता की उम्मीद करना बेमानी है।
“जो विभाग 4 किलोमीटर की सड़क ईमानदारी से नहीं बना सकता, वो करोड़ों के बड़े प्रोजेक्ट्स में कितनी ईमानदारी बरतता होगा, इसका अंदाजा सुखरी की इस बदहाल सड़क को देखकर लगाया जा सकता है।”
कागजों पर ‘चकाचक’, जमीन पर ‘गड्ढे ही गड्ढे’ – सबसे बड़ा खेल संधारण (Maintenance) के नाम पर हो रहा है। आलम यह है कि :
- सड़क टूटने के बाद कागजों पर मरम्मत की फाइलें दौड़ती हैं।
- सरकारी खजाने से पैसा रिलीज होता है।
- और वह पैसा सीधे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। धरातल पर स्थिति जस की तस है! संधारण का पैसा आखिर किसकी तिजोरी में जा रहा है?
जनता पूछे सवाल: यह विकास है या विनाश? – सुखरी क्षेत्र के लोग अब इस ‘भ्रष्टाचार के चारागाह’ के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। घटिया निर्माण और कमीशनखोरी के इस गठजोड़ ने सरकार की छवि को भी धूल चटा दी है। क्या सरगुजा कलेक्टर और विभाग के आला अधिकारी इस ‘भ्रष्ट तंत्र’ पर बुलडोजर चलाएंगे या फिर फाइलों में तेल डालकर सोते रहेंगे?
हमारा तीखा सवाल :
“साहब! डामर में डस्ट मिलाया है या ईमानदारी में ही डस्ट मिल गया है? 2.28 करोड़ की सड़क साल भर भी न टिक पाना विकास है या बेशर्मी की पराकाष्ठा?”




