सक्ती

वेदांता प्लांट का ‘खूनी’ बॉयलर : मुनाफे की भूख ने ली 20 जान, चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 10 पर FIR…

सक्ती। जिले में स्थित वेदांता प्लांट में एक भयावह हादसे ने विकास के दावों और औद्योगिक सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। उत्पादन दोगुना करने की ‘जानलेवा’ जल्दबाजी में बॉयलर फटने से अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 अन्य जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।

​इस मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 10 लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।

हादसे की मुख्य वजह : 350 से सीधे 590 मेगावाट का लोड – औद्योगिक सुरक्षा विभाग और FSL की शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक:

  • उत्पादन का दबाव : प्रबंधन ने महज एक घंटे के भीतर उत्पादन को दोगुना करने के लिए बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर 590 मेगावाट कर दिया।
  • फर्नेस ब्लास्ट : अत्यधिक ईंधन (फ्यूल) जमा होने के कारण भट्ठी के भीतर दबाव (Pressure) महज 1 से 2 सेकंड में इतना बढ़ गया कि सिस्टम को बंद करने का मौका ही नहीं मिला।
  • चेतावनी की अनदेखी : जांच में सामने आया कि मशीनों की हालत जर्जर थी और तकनीकी चेतावनी के बावजूद काम नहीं रोका गया।

FIR और कानूनी शिकंजा : एसपी प्रफुल्ल ठाकुर के निर्देश पर डभरा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है :

  • धारा 106 : लापरवाही से मौत।
  • धारा 289 : मशीनों के रखरखाव में लापरवाही।
  • धारा 3(5) : सामूहिक जिम्मेदारी। वर्तमान में एएसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में एक विशेष टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है।

हताहतों का विवरण: देश के कोने-कोने से आए थे मजदूर : ​हादसे में कुल 36 लोग झुलसे थे। मृतकों का आंकड़ा 20 तक पहुंच गया है, जिनमें से:

  • छत्तीसगढ़ : 04 मृतक
  • अन्य राज्य : उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मजदूर शामिल हैं।
  • गंभीर स्थिति : रायपुर के कालडा बर्न सेंटर में भर्ती मरीज 90% तक झुलस चुके हैं और वेंटिलेटर पर हैं।

मुआवजे का ऐलान और राजनीतिक गरमाहट – हादसे के बाद प्रशासन और विपक्ष दोनों सक्रिय हैं :

विपक्ष का हमला: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे ‘हादसा’ नहीं बल्कि ‘हत्या’ करार दिया है। कांग्रेस ने मृतकों के लिए 1 करोड़ रुपये और घायलों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे के साथ न्यायिक जांच की मांग की है। स्थानीय विधायक रामकुमार यादव ने आरोप लगाया कि प्लांट में पहले भी लिफ्ट गिरने जैसे हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रबंधन ने कोई सबक नहीं लिया।

जिम्मेदारों का रुख :

  • लखन लाल देवांगन (उद्योग मंत्री) : “दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी, घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।”
  • अमृत विकास तोपनो (कलेक्टर) : “प्लांट के मेंटेनेंस से जुड़े सारे डॉक्यूमेंट्स जब्त कर लिए गए हैं।”

नजरिया : यह हादसा स्पष्ट करता है कि जब कॉर्पोरेट जगत में मशीनों की क्षमता से ज्यादा ‘उत्पादन’ को प्राथमिकता दी जाती है, तो उसकी कीमत गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। क्या FIR और मुआवजे से उन 20 परिवारों का दर्द कम होगा, जिन्होंने अपनों को खो दिया? यह एक बड़ा सवाल है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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