चट्टानों की दरार में थमी नन्हे ‘गजराज’ की सांसें : रायगढ़ के जंगलों में हाथी शावक की दर्दनाक मौत…

रायगढ़। जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। घरघोड़ा विकासखंड के ग्राम कया के जंगलों में एक नन्हे हाथी (सावक) की मौत हो गई है। कुदरत की मार कहें या भौगोलिक परिस्थितियां, एक साल से भी कम उम्र का यह नर शावक पहाड़ियों की ढलान पर चलते समय दो विशाल चट्टानों के बीच ऐसी जगह फंसा कि फिर कभी उठ न सका।
घटनाक्रम : जब दल से बिछड़ गया मासूम –
- सूचना : 27 जनवरी की शाम ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी कि कक्ष क्रमांक 1310 में एक शावक मृत पड़ा है।
- चुनौती : सूचना मिलते ही वन अमला सक्रिय हुआ, लेकिन घना अंधेरा, दुर्गम रास्ता और मौके पर मौजूद हाथियों के आक्रामक दल की वजह से टीम तुरंत करीब नहीं पहुंच पाई।
- निरीक्षण : आज सुबह जब टीम मौके पर पहुंची, तो मंजर बेहद दुखद था। नन्हा शावक दो बड़ी चट्टानों की दरार में फंसा हुआ था।
मौत की प्रारंभिक वजह : ‘इंटरनल ब्लीडिंग’ – डीएफओ रायगढ़ के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में मौत की वजह गंभीर आंतरिक चोटें और रक्तस्राव (Internal Bleeding) मानी जा रही है। अत्यधिक ढलान होने के कारण शावक अनियंत्रित होकर गिर गया और चट्टानों के बीच फंसने से उसे संभलने का मौका नहीं मिला।
जंगल में तनाव : पहरे पर है हाथियों का दल – हाथी अपने साथियों के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं। शावक की मौत के बाद से ही हाथियों का दल घटना स्थल के आसपास ही मंडरा रहा है। इसे देखते हुए वन विभाग ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
“हाथी शावक का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिससे मौत के वास्तविक कारणों का तकनीकी खुलासा होगा। ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथियों के करीब न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।”
वन विभाग, रायगढ़
सावधानी : क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीण अकेले जंगल की ओर न जाएं। किसी भी हलचल पर तत्काल वन विभाग को सूचित करें।




