खनिज विभाग की ‘महादान’ योजना: रायगढ़-सारंगढ़ में माफियाओं को मिली ‘फ्री-पास’ की सौगात, बैरियर हटाकर प्रशासन ने कहा- “लूट सको तो लूट लो!”…

रायगढ़/सारंगढ़(विशेष व्यंग रिपोर्ट): लोकतंत्र की पुरानी परिभाषा बदल चुकी है। अब रायगढ़ और सारंगढ़ में ‘माफियाओं का, माफियाओं के लिए और माफियाओं द्वारा’ शासन चल रहा है। खनिज विभाग ने अपनी रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित अलमारी में रख दिया है और खनन माफियाओं के सामने रेड कार्पेट बिछा दिया है। जिले में अब “अवैध खनन” नहीं होता, बल्कि विभाग के संरक्षण में “राजस्व की अंत्येष्टि” मनाई जा रही है।
टिमरलगा बैरियर : माफिया की ‘प्राइवेट प्रॉपर्टी’ – टिमरलगा का खनिज बैरियर बंद होना इस सदी का सबसे बड़ा ‘प्रशासनिक चमत्कार’ है। बेचारे विभाग को लगा होगा कि सुपरवाइजर को धूप में बिठाकर क्यों परेशान करना? इसलिए उन्होंने माफियाओं को ही चाबियाँ सौंप दीं। अब माफिया तय करते हैं कि नाका कब बंद होगा और कब खुलेगा। स्थिति ऐसी है कि अगर कोई ट्रक गलती से टीपी (TP) दिखा दे, तो उसे शायद विभाग ‘पागल’ घोषित कर दे।
‘टीपी’ का दिव्य अवतार: एक बार छपवाओ, सौ बार चलाओ! – हमारे क्षेत्र के क्रशर संचालकों ने विज्ञान को फेल कर दिया है। उनके पास ऐसी ‘अक्षय टीपी’ है जो कभी खत्म नहीं होती। एक ही ट्रांजिट पास सुबह से शाम तक 300 गाड़ियों को पार करा देता है। खनिज विभाग ने शायद इस ‘जादुई पर्ची’ को वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा है। कागजों पर एक गाड़ी चल रही है और सड़कों पर ट्रकों की सुनामी आ रही है—डिजिटल इंडिया का इससे बेहतर उदाहरण और क्या होगा?
बैरियर नहीं, ‘भ्रष्टाचार का खुला द्वार’ है रायगढ़ – हमीरपुर और रेंगालपाली में बैरियर के नाम पर होमगार्ड के जवानों को बिठाकर विभाग अपनी ‘ईमानदारी’ का झुनझुना बजा रहा है। भालुमार और बड़े भंडार में बैरियर का प्रस्ताव पिछले कई सालों से इसलिए अटका है क्योंकि विभाग नहीं चाहता कि माफियाओं को ट्रक चलाने में कोई ‘मानसिक तनाव’ हो। रायगढ़ शहर में अवैध गिट्टी की एंट्री इतनी आसान है, जितनी बिना टिकट के सिनेमा हॉल में घुसना!
राजस्व की बलि और ब्लैक मनी की होली – सरकार बेचारी जीएसटी और रेत खदानों से चवन्नी-अठन्नी बटोरने में व्यस्त है, इधर लाइमस्टोन और डोलोमाइट के सुल्तान करोड़ों की ब्लैक मनी से होली खेल रहे हैं। प्रति गाड़ी होने वाली ‘वसूली’ का प्रसाद किस-किस ‘बड़े मंदिर’ के पुजारी तक पहुँच रहा है, यह पूरा शहर जानता है, बस विभाग के कान में रुई ठूँसी हुई है।
आज का ‘ज्ञान’ :
अगर आपको बिना मेहनत अमीर बनना है, तो रायगढ़-सारंगढ़ सीमा पर एक ‘नकाब’ पहनकर बैठ जाइए। न टीपी की चिंता, न विभाग का डर -बस गिट्टी पार कराइए और सिस्टम को धता बताइए!




