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धान परिवहन में घोर लापरवाही : जीपीएस फेल, 900 बोरी से भरा ट्रक 4 दिन जंगल में लापता

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में धान खरीदी परिवहन व्यवस्था की पोल खुल गई। गुंडरदेही के कोड़ेवा केंद्र से 900 बोरी धान लादकर निकला ट्रक चार दिनों तक गायब रहा, जबकि जीपीएस निगरानी अनिवार्य है। जंगल में खड़ा मिला यह ट्रक न केवल विभागीय नाकामी, बल्कि ठेकेदारों के गठजोड़ को भी उजागर करता है। किसानों का भरोसा तोड़ने वाली यह घटना जांच का दावा कर रही है।

ट्रक लापता, व्यवस्था सोई हुई

13 जनवरी को कोड़ेवा धान खरीदी केंद्र से दमन ट्रांसपोर्ट का ट्रक 900 बोरी धान लेकर रवाना हुआ। शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम निष्क्रिय रहा। चार दिन तक कोई सुराग न मिलने के बावजूद न ठेकेदार ने शिकायत की, न विभाग ने अलर्ट जारी किया। बालोद-कांकेर सीमा के बढ़भूम दमकसा गांव के पास घने जंगल में ग्रामीणों ने सड़क किनारे लावारिस ट्रक देखा। आपको बता दें कि यह ट्रक 900 बोरी धान लेकर रवाना हुआ था लेकिन लगभग 350 बोरी धान गायब होने की आशंका जताई जा रही है। जबकि सच्चाई बोरियो की गिनती में ही सामने आयेगी। इस मामले की भनक लगते ही देर रात प्रशासनिक दल पहुंचा, लेकिन तब तक भारी जनाक्रोश फैल चुका था।

ट्रांसपोर्टर का पुराना इतिहास

पिछले चार-पांच वर्षों से बालोद में धान परिवहन का जिम्मा दमन ट्रांसपोर्ट पर है। फुंडा, धोबनपुरी, जगतरा केंद्रों में धान की कमी के पुराने मामले इसी ठेकेदार से जुड़े हैं। सूत्र बताते हैं कि हमाली, भूसा ढुलाई जैसे कार्यों में फर्म का नाम बदलकर एक ही समूह सक्रिय है। ठेकेदारों की विभाग में गहरी पैठ होने से जांच नाममात्र की रहती है। राइस मिल कारोबारियों से संबंध भी जांच का विषय बने हैं।

जीपीएस व्यवस्था का पर्दाफाश

शासन द्वारा अनिवार्य जीपीएस निगरानी व्यवस्था धान परिवहन में नाकाम साबित हुई। ट्रक के गायब होने पर न तो रीयल-टाइम अलर्ट सक्रिय हुआ, न विभागीय नियंत्रण कक्ष ने संज्ञान लिया। ग्रामीणों के बिना यह मामला दबा रहता। जिला विपणन अधिकारी टिकेंद्र राठौर ने जांच का भरोसा दिया, किंतु जीपीएस फेल्योर और लापरवाही पर स्पष्टता नहीं दी।

जनता का गुस्सा उफान पर

ग्रामीणों ने सवाल उठाए कि आधुनिक निगरानी के जमाने में भरा-पूरा ट्रक कैसे चार दिन गायब रह सकता है? धान खरीदी किसानों की कमाई का मामला है, फिर भी व्यवस्था सो रही। स्थानीय स्तर पर ठेकेदारों-अधिकारियों के गठजोड़ की चर्चा जोरों पर है। लोग मांग कर रहे हैं कि न केवल लापता धान का हिसाब हो, बल्कि जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित हो।

व्यवस्था पर सवालों की बौछार

यह घटना एक ट्रक का मामला नहीं, बल्कि धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया पर सवाल है। ठेकेदार चयन, जीपीएस कार्यान्वयन, निगरानी तंत्र—सब कुछ जांच के घेरे में है। क्या दोषी ठेकेदार का लाइसेंस रद्द होगा? संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही कब होगी? किसानों का धान सुरक्षित रहे, इसके लिए क्या कड़े कदम उठेंगे? विपणन विभाग को पारदर्शी जांच रिपोर्ट जनता के सामने लानी होगी।

यह कांड छत्तीसगढ़ धान खरीदी की विश्वसनीयता को चुनौती देता है। यदि ऐसी लापरवाही पर तत्काल चेतावनी नहीं दी गई, तो भविष्य में बड़े घोटाले हो सकते हैं। किसान भाईयों का पसीना बेकार न जाए, इसके लिए शासन को कठोर रुख अपनाना होगा।

Feroz Ahmed Khan

संभाग प्रभारी : दुर्ग

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