विशेष रिपोर्ट : बेमेतरा में ‘कमीशनराज’ का तांडव – जनता के हक पर 40% रिश्वत का डाका!…

रायपुर/बेमेतरा: विकास की आड़ में भ्रष्टाचार का ऐसा ‘नग्न नृत्य’ शायद ही पहले कभी देखा गया हो। बेमेतरा जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में भ्रष्टाचार के जो पिटारे खुले हैं, उसने प्रशासन की विश्वसनीयता की धज्जियां उड़ा दी हैं। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में विकास कार्यों के नाम पर 40% तक की भारी-भरकम रिश्वत वसूली गई है। स्ट्रीट लाइट से लेकर जिम के सामान तक, हर सरकारी खरीद अब घोटाले की गवाही दे रही है।
DMF फंड बना ‘लूट का खजाना’ – सूत्रों और जनप्रतिनिधियों के दावों के अनुसार, यह पूरा खेल DMF (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि के साथ खेला गया है। आरोप है कि पूर्व जिला पंचायत CEO टेकचंद अग्रवाल और ADM रहते हुए SDM का प्रभार संभालने वाले प्रकाश भारद्वाज के कार्यकाल में नियमों को ताक पर रखकर जमकर बंदरबांट की गई।
घोटालों की फेहरिस्त: जहाँ रोशनी से लेकर पानी तक बिका – स्ट्रीट लाइट और LED घोटाला: अंधेरे में करोड़ों का वारा-न्यारा
नगर पंचायत मारो, परपोड़ी और नवागढ़ जनपद में स्ट्रीट लाइट के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’ मची है।
- हकीकत : बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर घटिया लाइटें खरीदी गईं।
- फर्जीवाड़ा : चौंकाने वाला आरोप है कि जिन वार्डों में लाइट लगी ही नहीं, वहां का भुगतान भी फाइलों में ‘ओके’ कर दिया गया। वारंटी और मेंटेनेंस सिर्फ कागजों तक सीमित है।
टैंकर घोटाला: प्यास बुझाने के नाम पर अपनी तिजोरी भरी : साजा और नवागढ़ में 15वें वित्त की राशि उपलब्ध होने के बावजूद टैंकरों की नई खेप खरीदी गई।
- पैटर्न : चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने के लिए पारदर्शिता की बलि दी गई। कई टैंकर तो आज भी कबाड़ में तब्दील हैं या सिर्फ कागजों पर दौड़ रहे हैं।
स्वामी आत्मानंद स्कूल : शिक्षा के मंदिर में GYM का खेल – आदर्श शिक्षा का दम भरने वाले स्वामी आत्मानंद स्कूलों में जिम सामग्री खरीदी के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है।
- घोटाला : अत्यंत घटिया स्तर की जिम मशीनें कई गुना दाम पर खरीदी गईं। आज ये उपकरण शो-पीस बनकर रह गए हैं और बच्चों के उपयोग के लायक ही नहीं हैं।
‘अनभिज्ञ’ प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का आक्रोश – सामान्य सभा में जब इन मुद्दों पर तूफान उठा, तो वर्तमान कलेक्टर और जिला पंचायत CEO ने ‘अनभिज्ञता’ जाहिर की। प्रशासन के इस टालमटोल भरे जवाब से नाराज सदस्यों ने दो टूक शब्दों में कहा— “योजनाएं जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि कमीशनखोरी की मशीन बन चुकी हैं।”
मुख्य सवाल: क्या 40% रिश्वत के दावों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी सुरक्षित रहेंगे?
- बिना काम के भुगतान करने वाले इंजीनियरों और बाबुओं पर गाज कब गिरेगी?
- क्या सरकार किसी स्वतंत्र एजेंसी से इस ‘महाघोटाले’ की जांच कराएगी?
बेमेतरा जिला पंचायत में उठा यह बवंडर शांत होने वाला नहीं है। भ्रष्टाचार का यह दीमक सिस्टम को खोखला कर चुका है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली सरकार इन ‘सफेदपोश लुटेरों’ और भ्रष्टाचार के सिंडिकेट पर नकेल कसती है या जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होगी।





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