रायगढ़
16 चक्का में 34 टन लोड का खेल : RTO–PWD–ठेकेदार की तिकड़ी ने घरघोड़ा की सड़कों को कब्रगाह में बदला…

रायगढ़। ज़िले के घरघोड़ा इलाके की सड़कों पर आजकल 16 चक्का ट्रकों का दबदबा है। इन ट्रकों में ओवरलोडिंग का आलम यह है कि 34 टन से भी ज्यादा सामान लादकर दौड़ रहे हैं। नियम कहता है कि इतने पहियों वाले ट्रक का लोड लिमिट तय है, लेकिन RTO रायगढ़ की मिलीभगत और PWD की खामोशी ने इस गोरखधंधे को खुला लाइसेंस दे रखा है।
RTO की भूमिका :
- RTO अधिकारियों की सरपरस्ती में चल रहा ओवरलोडिंग का धंधा।
- चेकपोस्ट पर नजराना लेकर ट्रकों को खुली छूट।
- ओवरलोडिंग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और मौतों पर आंख मूंदकर बैठा विभाग।
PWD की चुप्पी :
- जिन सड़कों पर 10 टन से ज्यादा लोड का दबाव झेलना मुश्किल है, वहां 34 टन का लोड दौड़ रहा है।
- सड़कें चंद महीनों में गड्ढों में तब्दील हो चुकीं।
- PWD इंजीनियरों और अफसरों की खामोशी, दरअसल ठेकेदारों से मिलीभगत का नतीजा है।
ठेकेदार की चालबाजी :
- सड़क निर्माण के लिए करोड़ों की राशि पचाई।
- घटिया मटेरियल से बनी सड़कें ओवरलोडिंग का दबाव झेल ही नहीं पा रहीं।
- सड़क बनाने वाला ठेकेदार ही ओवरलोड ट्रक चालकों से मिला हुआ है, ताकि नए प्रोजेक्ट के नाम पर और ठेका मिल सके।
जनता पर असर :
- गड्ढों और टूटी सड़कों से आम जनता की जान खतरे में।
- किसानों और आम यात्रियों की ज़िंदगी रोज दांव पर।
- दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा, लेकिन जिम्मेदार विभागों पर कोई कार्रवाई नहीं।
👉 सवाल उठता है – जब कानून साफ कहता है कि ओवरलोडिंग अपराध है, तो RTO–PWD–ठेकेदार की यह तिकड़ी क्यों अब तक बेनकाब नहीं हुई? क्या सड़कें सिर्फ नेताओं और अफसरों की जेबें भरने के लिए बनाई जाती हैं, या जनता की सुविधा के लिए?




