जामनिक सलाखों के पीछे तो सिद्दीकी कुर्सी पर कैसे? जल संसाधन विभाग में किसका चल रहा ‘समानांतर संविधान’?…

रायपुर। छत्तीसगढ़ का जल संसाधन विभाग इस वक्त नियमों, नैतिकता और शासन व्यवस्था की खुली नीलामी का अखाड़ा बन चुका है। ठेकेदारों पर सरकारी खजाने से करोड़ों की रेवड़ियां लुटाने वाले भ्रष्ट अफसरों को सजा देने के नाम पर जो तमाशा रचा गया है, उसने समूची प्रशासनिक मशीनरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। टेंडर की शर्तों का कत्ल कर ठेकेदारों को समय से पहले अतिरिक्त सुरक्षा निधि (एपीएस) लौटाने के बहुचर्चित महाघोटाले में मंत्रालय की ‘कार्रवाई’ दरअसल सजा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर दी गई खुली दावत साबित हो रही है।
एक ही अपराध, दो कानून : जामनिक पर FIR और जेल, सिद्दीकी को लाल कालीन! – विभाग की बेशर्मी का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि एक ही तरह के घोटाले में दो अफसरों के लिए दो अलग-अलग संविधान लागू किए गए:
- जशपुर ईई विजय जामनिक : अतिरिक्त सुरक्षा निधि में हेराफेरी के आरोप में आईपीसी की संगीन धारा 409 (सरकारी अमानत में खयानत) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ और तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर जेल का रास्ता दिखा दिया गया।
- कोटा ईई आई.ए. सिद्दीकी : ठीक वही अपराध, वही भ्रष्टाचार – लेकिन सिद्दीकी की सिर्फ एक वेतनवृद्धि (असंचयी प्रभाव) रोकने का मामूली नाटक किया गया। यानी अपराध समान, लेकिन रसूख के दम पर एक को सलाखें और दूसरे को मलाईदार कुर्सियां!
सदन में मुख्यमंत्री को ठगा : विधानसभा में बोला गया सफेद झूठ – शीतकालीन सत्र के दौरान कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस लूट का पर्दाफाश सदन में किया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन के पटल पर पूरे भरोसे के साथ घोषणा की थी कि ‘विजय जामनिक की तरह सिद्दीकी, गुप्ता और मजूमदार जैसे तमाम दोषी अफसरों पर कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई होगी।’
लेकिन मंत्रालय के भ्रष्ट सिंडिकेट ने न केवल मुख्यमंत्री के आश्वासन की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि पूरे सदन की आंखों में धूल झोंक दी। जिस अफसर को जेल के भीतर होना चाहिए था, उसे फरवरी 2026 में कार्यपालन अभियंता (ईई) से अधीक्षण अभियंता (एसई) पद पर पदोन्नत कर दिया गया। जब विधायक विद्यावती सिदार ने ध्यानाकर्षण के जरिए इस फर्जीवाड़े को उजागर किया, तो विभाग ने बेशर्मी से लिखित में झूठ बोल दिया कि ‘प्रमोशन के वक्त सिद्दीकी पर कोई विभागीय जांच लंबित नहीं थी।’
दबेना एनीकट में 51 लाख की एफडीआर का बंदरबांट – करोड़ों के इस खेल की जड़ें दबेना एनीकट परियोजना से जुड़ी हैं :
- कम दर पर ठेका : 4 करोड़ 13 लाख रुपये का यह प्रोजेक्ट ठेकेदार ने तय दर से 20 फीसदी कम (Minus) पर हासिल किया।
- शर्तों की अनदेखी : नियम कहता है कि 10 फीसदी से अधिक कम दर होने पर ठेकेदार को अतिरिक्त सुरक्षा राशि विभाग में टीडीआर/एफडीआर के रूप में जमा रखनी होती है, जो काम पूरा होने के बाद ही वापस हो सकती है।
- खुली डकैती : ठेकेदार ने 2 जून 2023 को 51 लाख 65 हजार 444 रुपये की एफडीआर जमा की। सिद्दीकी ने ठेकेदार से सांठगांठ कर 30 जनवरी 2024 को काम अधूरा रहते ही यह एफडीआर रिलीज कर दी और रनिंग बिल का भी धड़ल्ले से भुगतान कर दिया।
जब मामले की आंच सिद्दीकी तक पहुंची, तो उन्होंने तखतपुर के एसडीओ के सिर पर ठीकरा फोड़ते हुए दलील दी कि ‘एसडीओ के कहने पर पैसा लौटाया, बाकी संभागों में भी तो यही होता है!’ प्रमुख अभियंता ने इन लचर बहानों को सिरे से खारिज कर दिया। फिर भी मंत्रालय के उप सचिव रवीन्द्र कुमार मेढ़ेकर के दस्तखत से महज एक वेतनवृद्धि रोकने की कागजी रस्म अदायगी कर मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
हाईकोर्ट के आदेश को ठेंगा, चीफ इंजीनियर की कुर्सी पर ताजपोशी – इस सिंडिकेट की ढिठाई यहीं नहीं रुकी। बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रमोट हुए अधीक्षण अभियंताओं की पदस्थापना (पोस्टिंग) पर साफ तौर पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद कानून और अदालत के आदेशों को पैरों तले रौंदते हुए जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम ने अपने विशेषाधिकार का नंगा नाच दिखाया। कोर्ट के स्टे के बावजूद सिद्दीकी को विभाग के सबसे मलाईदार और संवेदनशील पद – कार्यकारी मुख्य अभियंता (प्रबोधन) की कुर्सी पर बिठा दिया गया।
सुलगते सवाल, जिनका जवाब सरकार को देना होगा :
- सदन में सीएम को गुमराह करने वाला असली सूत्रधार कौन है? विधानसभा में सीएम द्वारा कार्रवाई का वादा किए जाने के बावजूद सिद्दीकी की चार्जशीट किसने दबाई और प्रमोशन की फाइल किसने क्लीयर कराई?
- कानून का यह दोहरा चरित्र क्यों? जब जामनिक पर 409 और 420 का मुकदमा दर्ज हो सकता है, तो सिद्दीकी को थाने भेजने के बजाय मुख्य अभियंता की कुर्सी क्यों सौंपी गई?
- हाईकोर्ट के स्टे की अवहेलना का दोषी कौन? अदालत की रोक के बावजूद दागी अफसर को चीफ इंजीनियर बनाने वाले ई-इन-सी जितेंद्र नेताम पर अवमानना की कार्रवाई कब होगी?
- क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ जुमला है? क्या विष्णुदेव साय सरकार भ्रष्ट अफसरों के इस गिरोह पर बुलडोजर चलाकर संदेश देगी, या अफसरशाही इसी तरह सरकार की साख को गिरवी रखती रहेगी?




