हाईकोर्ट से 2021 में याचिका खारिज, 10 फरवरी 2026 को कलेक्टरेट में नई शिकायत दर्ज : फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में घिरे सहकारी निरीक्षक गोपाल प्रसाद बिंद पर अब तक मेहरबानी क्यों?…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे आदिवासियों के संवैधानिक हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ विभागीय सुस्ती और प्रशासनिक अनदेखी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मामला सहकारिता विभाग, बिलासपुर के उप पंजीयक कार्यालय का है, जहां खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताकर वर्षों से नौकरी कर रहे सहकारी निरीक्षक गोपाल प्रसाद बिंद पर माननीय उच्च न्यायालय से राहत खत्म होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब 10 फरवरी 2026 को कलेक्टर और सहकारिता विभाग के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर एफआईआर और सरकारी धन की वसूली की मांग की गई है।

तारीख-दर-तारीख सामने आई प्रशासनिक लापरवाही की हकीकत :
- 23 सितंबर 2021 – हाईकोर्ट से याचिका खारिज: जाति प्रमाण पत्र जांच के मामले में गोपाल प्रसाद बिंद ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी (WPS No. 1510/2014 – गोपाल प्रसाद बिंद विरुद्ध छत्तीसगढ़ राज्य व अन्य) 23 सितंबर 2021 को माननीय न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा आगे पैरवी न करने के बयान पर इस याचिका को पूरी तरह खारिज (Dismiss) कर दिया। इसके साथ ही अधिकारी के पक्ष में किसी भी प्रकार का कानूनी संरक्षण या स्टे समाप्त हो गया।
- 23 अक्टूबर 2021 – महाधिवक्ता कार्यालय ने शासन व कलेक्टर को भेजा पत्र : हाईकोर्ट के फैसले के ठीक एक महीने बाद, 23 अक्टूबर 2021 को महाधिवक्ता कार्यालय (छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर) के उप शासकीय अधिवक्ता द्वारा पत्र क्रमांक AG/CG/BSP/21/7483-84 जारी किया गया। यह पत्र प्रमुख सचिव (सहकारिता विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर) और कलेक्टर (बिलासपुर) को प्रेषित करते हुए कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति संलग्न कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया था।
- 10 फरवरी 2026 – आदिवासी समाज ने फिर खोला मोर्चा : कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश के बावजूद वर्षों तक फाइल दबी रही और संबंधित अधिकारी पद पर बने रहकर नियमित वेतन आहरित करते रहे। इसके विरोध में 10 फरवरी 2026 को प्रार्थी गणेश राम एवं सर्व आदिवासी समाज की ओर से कलेक्टर बिलासपुर (आवक क्रमांक 659, दिनांक 10/02/2026) तथा उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं (पंजीयन क्रमांक 409, दिनांक 10/02/2026) में विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई।
क्या है पूरा मामला और आरोप? – शिकायत पत्र के मुताबिक, सहकारी निरीक्षक गोपाल प्रसाद बिंद मूलतः अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की ‘लोनिया/नोनिया/नोनियार’ जाति से आते हैं। आरोप है कि उन्होंने कूटचरित तरीके से अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रमाण पत्र बनवाकर आदिवासी कोटे से सरकारी सेवा हासिल की।

शिकायतकर्ता का कहना है कि राज्य शासन द्वारा जारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारक अधिकारी-कर्मचारियों की आधिकारिक सूची में गोपाल प्रसाद बिंद का नाम पहले से शामिल होने के बावजूद उन्हें लगातार संरक्षण दिया जा रहा है।
प्रशासन से प्रमुख मांगें :
- तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी : फर्जी दस्तावेज के आधार पर हासिल की गई सेवा को तुरंत समाप्त किया जाए।
- आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज : आदिवासियों के वैधानिक अधिकारों का हनन करने और शासन से धोखाधड़ी के आरोप में सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हो।
- वेतन-भत्तों की पाई-पाई की रिकवरी : अब तक सरकारी खजाने से आहरित किए गए समस्त वेतन व वित्तीय परिलाभों की वसूली (Recovery) सुनिश्चित की जाए।
बड़ा सवाल : जब 23 सितंबर 2021 को ही हाईकोर्ट से याचिका खारिज हो चुकी थी और 23 अक्टूबर 2021 को शासन व जिला प्रशासन को आदेश तामील करा दिया गया था, तो बीते वर्षों में इस आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ? क्या आदिवासियों के हितों का दावा करने वाले तंत्र में रसूखदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, या 10 फरवरी 2026 की यह ताजा शिकायत भी सिर्फ फाइलों में दफन रह जाएगी?




