रायगढ़

“तुम आतंकवादी हो, सिम तुम्हारे नाम की है”: फर्जी कमिश्नर बनकर धमकाया, रायगढ़ के रिटायर्ड शिक्षक ने मिनटों में हवा कर दी ठगों की हेकड़ी…

  • मुंबई पुलिस और कमिश्नर कार्यालय के नाम पर डराने की रची थी साजिश, सूझबूझ से नाकाम हुआ डिजिटल अरेस्ट का पैंतरा
  • रायगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” का जमीनी असर : कॉल पर ही ठग को लताड़ा, सीधे एसपी दफ्तर पहुंचकर दर्ज कराई शिकायत
  • गांव-गली से लेकर क्रिकेट के मैदान तक पुलिस की पैठ; घरघोड़ा, खरसिया और पूंजीपथरा में युवाओं को दिया सुरक्षा मंत्र

रायगढ़। डिजिटल अरेस्ट और खाकी का खौफ दिखाकर आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले साइबर अपराधियों के होश उस वक्त उड़ गए, जब उनका पाला रायगढ़ के एक जागरूक रिटायर्ड शिक्षक से पड़ा। कॉलर ने खुद को मुंबई सेंट्रल कमिश्नर ऑफिस का आला अधिकारी बताकर दावा किया कि पकड़े गए आतंकियों के पास उनके नाम का सिम मिला है। इरादा साफ था – सीधे आतंक का नाम लेकर मानसिक दबाव बनाना और लाखों रुपये ऐंठना। लेकिन सामने रायगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” से लैस एक ऐसा सजग नागरिक था, जिसने खौफ के इस पूरे ड्रामे को एक झटके में ध्वस्त कर दिया।

कांपने के बजाय फोन पर ही दिया करारा जवाब – 8 सितंबर की शाम केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी व रिटायर्ड शिक्षक तिलक कुमार कटकवार के फोन पर अनजान नंबर से कॉल आया। स्क्रीन के उस पार शातिर जालसाज रौब झाड़ते हुए उन्हें सीधे आतंकवादी साजिश में फंसाने और जेल भेजने की धमकियां दे रहा था। आम तौर पर ऐसे मामलों में लोग घबराकर पैसे ट्रांसफर कर बैठते हैं, लेकिन श्री कटकवार ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने न केवल कॉलर की साजिश को तुरंत भांप लिया, बल्कि उसे फोन पर ही खरी-खोटी सुनाते हुए स्पष्ट कह दिया कि वे इस फर्जीवाड़े में फंसने वाले नहीं हैं। फोन काटते ही वे सीधे रायगढ़ पुलिस कार्यालय पहुंचे और अफसरों को मामले से अवगत कराया।

जनता से अपील : वर्दी का डर दिखाकर ठगना नया जाल, 1930 पर दें सूचना – श्री कटकवार ने नागरिकों को संदेश देते हुए कहा कि कोई भी फर्जी अफसर बनकर मनी लॉन्ड्रिंग, गिरफ्तारी या आतंकी केस की धमकी दे, तो डरें बिल्कुल नहीं। बैंक डिटेल, ओटीपी या कोई भी निजी पहचान साझा करने के बजाय तुरंत फोन काटें और सीधे नजदीकी थाने या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

मैदान से लेकर चौपाल तक पुलिस की घेराबंदी – जिले में चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान का दायरा लगातार बढ़ रहा है:

  • घरघोड़ा, खरसिया और तमनार : थानों में नागरिकों को साइबर अपराध के नए हथकंडों से आगाह किया गया। युवाओं को ‘साइबर अवेयरनेस सेल्फी’ के जरिए सोशल मीडिया पर सुरक्षा संदेश फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
  • पूंजीपथरा : पुलिस टीमों ने छर्राटांगर और सराईपाली के गांवों से लेकर क्रिकेट टूर्नामेंट के मैदानों तक युवाओं को घेरा। गेमिंग फ्रॉड, फर्जी लोन ऐप, फर्जी निवेश और केवाईसी फ्रॉड के खतरों से आगाह किया गया।
  • डिजिटल अरेस्ट पूरी तरह फर्जी : पुलिस ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। सीबीआई, ईडी या पुलिस कभी वीडियो कॉल पर पूछताछ कर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव नहीं बनाती।

रायगढ़ पुलिस की सक्रियता और नागरिकों की जागरूकता ने यह साबित कर दिया है कि साइबर ठगों की धमकियों का सबसे अचूक तोड़ केवल और केवल सतर्कता और निडरता है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!