रायगढ़ प्रशासन का बड़ा एक्शन : ‘ग्रीन पार्क कॉलोनी’ का लाइसेंस निरस्त, प्लॉटों की खरीद-बिक्री पर बैन; कॉलोनाइजर पर FIR की तैयारी…

रायगढ़। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के हक की जमीन में फर्जीवाड़ा कॉलोनाइजर को भारी पड़ गया है। ग्राम बड़े अतरमुड़ा स्थित ‘ग्रीन पार्क कॉलोनी’ के विकासकर्ता अभिषेक अग्रवाल पर जिला प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाते हुए कॉलोनी का रजिस्ट्रीकरण (लाइसेंस) तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के कड़े रुख के बाद एसडीएम ने खसरा नंबर 198/5 (रकबा 1.978 हेक्टेयर) पर स्थित इस कॉलोनी के सभी प्लॉटों के क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
पुसौर की कृषि भूमि को बता दिया EWS का कोटा – एसडीएम रायगढ़ महेश शर्मा के अनुसार, नियमानुसार कॉलोनी में 15 प्रतिशत भूमि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित रखी जानी थी। जब प्रशासन ने दस्तावेज मांगे, तो विकासकर्ता ने ग्राम नवापाली (तहसील पुसौर) की जमीन को EWS कोटे का बताकर गुमराह करने की कोशिश की। प्रशासनिक जांच में पोल खुल गई – उक्त जमीन राजस्व रिकॉर्ड में कॉलोनाइजर के नाम पर कृषि भूमि के रूप में दर्ज निकली। न तो इसे सक्षम प्राधिकारी को हस्तांतरित किया गया था और न ही यह जमीन तय कॉलोनी सीमा के दायरे में थी।
दांडिक कार्रवाई की तलवार, तहसीलदार 1 माह में देंगे रिपोर्ट – प्रशासन अब कॉलोनाइजर के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत दांडिक कार्रवाई (FIR) की तैयारी में है। तहसीलदार रायगढ़ को निर्देश दिए गए हैं कि ग्रीन पार्क कॉलोनी में अब तक काटे और बेचे गए सभी भूखंडों की विस्तृत जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट पेश करें।
2015 से 2026 तक की सभी कॉलोनियों की कुंडली खंगालेगा प्रशासन – कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के आदेश के बाद पूरे जिले के रियल एस्टेट कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन अब वर्ष 2015 से 2026 के बीच स्वीकृत सभी कॉलोनियों की फाइलों की गहन पड़ताल कर रहा है। इसमें देखा जाएगा कि बिल्डरों ने EWS वर्ग के लिए जमीन मौके पर छोड़ी है या केवल कागजी खानापूर्ति कर उसे भी बाजार में खपा दिया है। अनियमितता मिलने पर अन्य कॉलोनाइजरों के खिलाफ भी ऐसे ही सख्त कदम उठाए जाएंगे।




