सारंगढ़ PDS में बड़ा घोटाला: 372 क्विंटल सरकारी चावल का गबन, श्री गणेश समूह को थमाया 7 दिन का अल्टीमेटम…

सारंगढ़। गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले पीडीएस माफियाओं के खिलाफ खाद्य विभाग ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। वार्ड क्रमांक 12 स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी क्रमांक 411003005) में भौतिक सत्यापन के दौरान 372.12 क्विंटल चावल और करीब 1 क्विंटल शक्कर गायब पाई गई। गरीबों के राशन की इस खुली हेराफेरी के सामने आते ही खाद्य महकमे में हड़कंप मच गया है। विभाग ने दुकान संचालक श्री गणेश बचत एवं साख समूह की अध्यक्ष सह विक्रेता श्रीमती संतोषी बरेठ और सचिव गीता बरेठ को ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
रिकॉर्ड में 425 क्विंटल, मौके पर मिलीं सिर्फ 107 बोरियां – जिला खाद्य अधिकारी और सहायक खाद्य अधिकारी की संयुक्त टीम ने 24 जुलाई 2026 को स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में दुकान का औचक भौतिक सत्यापन किया। ऑनलाइन AEPDS सर्वर के अनुसार दुकान में 425.62 क्विंटल चावल दर्ज था, जबकि मौके पर केवल 107 बोरियों में 53.50 क्विंटल चावल ही बरामद हुआ।
सीधे तौर पर 372.12 क्विंटल (37,212 किलोग्राम) चावल मौके से नदारद मिला। इसके अलावा रिकॉर्ड में दर्ज 93 किग्रा शक्कर के मुकाबले दुकान में शक्कर का स्टॉक पूरी तरह निरंक (शून्य) मिला, यानी 0.92 क्विंटल शक्कर भी गायब कर दी गई थी। वहीं नमक के स्टॉक में 3.30 क्विंटल की अनाधिकृत बढ़ोतरी पाई गई।
सवालों पर साधी चुप्पी, कहा- ‘सितंबर तक कर देंगे भरपाई’ – जांच अधिकारियों ने जब इतनी भारी मात्रा में खाद्यान्न गायब होने पर विक्रेता संतोषी बरेठ से जवाब तलब किया, तो वह कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। गबन पर पर्दा डालने की कोशिश करते हुए उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘कमी की भरपाई आगामी सितंबर माह के अंत तक कर दी जाएगी’। सवाल उठता है कि गरीबों के वितरण के लिए आया सैकड़ों क्विंटल सरकारी अनाज आखिर किस बाजार में खपाया गया?
आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत नपेगा संचालक समूह – कलेक्टर कार्यालय (खाद्य शाखा), सारंगढ़-बिलाईगढ़ द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में साफ किया गया है कि संचालक समूह का यह कृत्य:
- छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2016 की कंडिका 5(1), 5(26), 5(27), 9(18) और 11(1)(2) का खुला उल्लंघन है।
- यह मामला आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत गैर-जमानती और गंभीर दंडनीय अपराध के दायरे में आता है।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिवस के भीतर संतोषजनक लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो समूह पर एकपक्षीय दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।




