सरकारी सब्सिडी वाली ‘भारत यूरिया’ पर उठे सवाल, किसानों ने निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली का लगाया आरोप, जांच की मांग तेज…

पत्थलगांव। केंद्र सरकार किसानों को कम लागत पर खेती के लिए उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत सब्सिडी वाली ‘भारत यूरिया’ उपलब्ध करा रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को निर्धारित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हो और किसानों को राहत मिल सके। लेकिन पत्थलगांव क्षेत्र में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि जशपुर रोड स्थित एक खाद विक्रेता के यहां ‘भारत यूरिया’ की 45 किलोग्राम वाली बोरी, जिस पर ₹266.50 प्रति बोरी अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित है, उसे निर्धारित मूल्य से अधिक राशि लेकर बेचा जा रहा है। किसानों का कहना है कि खेती के मौसम में यूरिया की अधिक मांग का फायदा उठाकर कुछ विक्रेता मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
किसानों के अनुसार, उन्हें कई बार यह कहकर अधिक राशि देने के लिए मजबूर किया जाता है कि यदि निर्धारित मूल्य की बात करेंगे तो खाद उपलब्ध नहीं हो पाएगी। किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें अतिरिक्त पैसे देकर खाद खरीदनी पड़ रही है, क्योंकि समय पर यूरिया नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है।
इस मामले में सामने आई तस्वीरों में ‘भारत यूरिया’ की बोरी पर स्पष्ट रूप से ₹266.50 प्रति बोरी का अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित दिखाई देता है। किसानों का दावा है कि इसके बावजूद उनसे अधिक कीमत वसूली गई। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक संबंधित विभाग द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यदि किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल निर्धारित मूल्य का उल्लंघन नहीं होगा, बल्कि सरकार द्वारा किसानों के लिए दी जा रही सब्सिडी के उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। सरकार हर वर्ष उर्वरकों पर हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी इसलिए देती है ताकि किसानों को राहत मिल सके। ऐसे में यदि किसी स्तर पर निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली होती है, तो उसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ता है।
किसानों ने कृषि विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित दुकान के बिक्री रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, बिल-बुक और वितरण रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और किसानों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस दिलाई जाए।
इस पूरे मामले ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और प्रभावी निगरानी होती, तो इस तरह के आरोप सामने नहीं आते।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और कृषि विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसानों द्वारा लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, और यदि सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर किसानों का विश्वास बहाल किया जाना चाहिए।
(यह रिपोर्ट स्थानीय किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों की पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।)
मामले में जल्द सारे सबूतों के साथ जारी होगा भाग 2 – बने रहें RM24 के साथ .




