कलेक्टर का कड़ा संदेश : हफ्ते भर पहले तय था निरीक्षण, CMO रहे गायब; भड़के कलेक्टर व्यास ने कराया ऑफिस सील।…

जशपुर। जिला मुख्यालय जशपुर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कलेक्टर रोहित व्यास के सख्त निर्देश पर राजस्व अधिकारियों की टीम ने अचानक नगर पालिका परिषद स्थित मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के दफ्तर को सील कर दिया। हालांकि, विभागीय प्रक्रियाओं और प्रशासनिक कार्रवाई के कुछ ही समय बाद दफ्तर का ताला वापस खोल दिया गया, लेकिन इस अप्रत्याशित कार्रवाई से पूरे नगर पालिका परिसर में इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया।
निरीक्षण के दौरान नदारद मिले अधिकारी, अध्यक्ष ने जताई नाराजगी – मामले की पृष्ठभूमि शहर में जारी विकास कार्यों के निरीक्षण से जुड़ी हुई है। नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने जानकारी देते हुए बताया कि शहर के विभिन्न वार्डों में संचालित विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए कलेक्टर रोहित व्यास के साथ निरीक्षण का कार्यक्रम तय किया गया था। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण की योजना करीब एक सप्ताह पूर्व ही बना ली गई थी।
तय समय और कार्यक्रम के अनुसार कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी मौके पर पहुंच गए, लेकिन पूरी व्यवस्था का मुख्य जिम्मा संभालने वाले CMO योगेश्वर उपाध्याय वहां से नदारद रहे।
निरीक्षण स्थल पर ही अध्यक्ष अरविंद भगत ने कलेक्टर के समक्ष अपनी गंभीर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कलेक्टर को बताया कि:
- शहर में चल रहे विकास कार्य सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
- नगर पालिका परिषद द्वारा जनहित में लिए गए निर्णयों और प्रस्तावों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है।
- लगातार पूर्व-नियोजित कार्यक्रमों में गैर-मौजूदगी से विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही है।
कॉल पर जवाब से असंतोष, तत्काल दफ्तर सील करने के निर्देश – नगर पालिका अध्यक्ष की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर रोहित व्यास ने मौके से ही CMO योगेश्वर उपाध्याय को फोन लगाकर उनकी अनुपस्थिति का कारण पूछा। फोन पर CMO ने जानकारी दी कि वे विभागीय बैठक में शामिल होने के लिए अंबिकापुर स्थित जॉइंट डायरेक्टर (JD) कार्यालय में मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व-निर्धारित निरीक्षण के बावजूद बिना ठोस सूचना के मुख्यालय से बाहर रहने और उनके दिए गए स्पष्टीकरण से कलेक्टर संतुष्ट नहीं हुए। कलेक्टर व्यास ने प्रशासनिक अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से राजस्व अधिकारियों की टीम को सीएमओ कार्यालय सील करने का फरमान जारी कर दिया। आदेश मिलते ही राजस्व टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर CMO का कक्ष सील कर दिया।
दावों में विरोधाभास : बिलासपुर, अंबिकापुर या पूर्व-नियोजित बैठक? – इस पूरी कार्रवाई पर CMO योगेश्वर उपाध्याय का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने अपने बचाव में कहा कि वे विभागीय और न्यायालयीन कार्यों के सिलसिले में बिलासपुर गए हुए थे, जिसके बाद शुक्रवार को अंबिकापुर स्थित जेडी कार्यालय की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि वे शाम तक वापस जशपुर लौट आएंगे।
हालांकि, इस मामले में CMO के बयानों और नगर पालिका अध्यक्ष के तर्कों में साफ विरोधाभास नजर आ रहा है :
“जब निरीक्षण का कार्यक्रम एक सप्ताह पहले से ही तय और प्रस्तावित था, तो ऐसी स्थिति में बिना पूर्व सूचना के CMO का मुख्यालय से बाहर रहना कार्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। इसी वजह से कलेक्टर महोदय से शिकायत की गई थी, जिस पर यह त्वरित कार्रवाई हुई।”
अरविंद भगत, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद जशपुर
प्रशासनिक अमले में स्पष्ट संदेश : भले ही कुछ देर बाद सील हटा दी गई हो, लेकिन कलेक्टर रोहित व्यास की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने जिले के प्रशासनिक तंत्र में एक कड़ा संदेश दे दिया है। विकास कार्यों में सुस्ती, बैठकों से नदारद रहने और जनहित के फैसलों को लागू करने में बरती जाने वाली ढिलाई को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल इस घटनाक्रम के बाद से नगर पालिका के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं।




