जशपुर में न्याय की मिसाल : मासूम बेटी से दरिंदगी करने वाले कलयुगी पिता को जीवनभर के लिए जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया…

- खाकी और न्यायपालिका की त्वरित कार्रवाई: महज एक महीने के भीतर पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला…
जशपुर। रिश्तों को कलंकित करने वाली यह दिल दहला देने वाली घटना जशपुर जिले के थाना कांसाबेल अंतर्गत सामने आई थी। दिनांक 02 मई 2026 को पीड़िता की मां ने थाने पहुंचकर एक अत्यंत संवेदनशील और डरावनी रिपोर्ट दर्ज कराई। मां ने पुलिस को बताया कि उसका पति कलेश्वर विश्वकर्मा पिछले तीन वर्षों से अपनी ही 13 वर्षीय नाबालिग मासूम बेटी को डरा-धमका कर लगातार अपनी हवस का शिकार बना रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना कांसाबेल पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2), 296, 351(2), 115(2) तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की सुसंगत धाराओं के तहत अपराध क्रमांक 75/2026 पंजीबद्ध किया गया।
जशपुर पुलिस की ताबड़तोड़ और पेशेवर कार्रवाई – इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह ने पूरे मामले को व्यक्तिगत संज्ञान में लेते हुए त्वरित और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार पाटनवार के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए निम्नलिखित कदम उठाए:
- तत्काल गिरफ्तारी : रिपोर्ट दर्ज होने के ही दिन (02 मई 2026) आरोपी पिता को पुलिस ने धर दबोचा और न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
- पीड़िता की सुरक्षा व मेडिकल : पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसका तुरंत चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके बयान दर्ज करवाए गए।
- रिकॉर्ड समय में चालान : थाना प्रभारी कांसाबेल निरीक्षक जितेंद्र कुमार ताम्रकार ने बेहद पेशेवर, संवेदनशील और त्रुटिहीन विवेचना करते हुए मात्र कुछ ही हफ्तों के भीतर सभी वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्य जुटा लिए। इसके बाद 17 जून 2026 को माननीय न्यायालय में अभियोग पत्र (चालान) प्रस्तुत कर दिया गया।
अदालत में मजबूत पैरवी और ऐतिहासिक सजा – माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो), जशपुर में इस बहुचर्चित मामले की त्वरित सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार तिर्की ने बेहद सशक्त, दमदार और प्रभावी पैरवी की।
अदालत में अभियोजन की ओर से कुल 20 गवाहों के पुख्ता साक्ष्य और अकाट्य दस्तावेज पेश किए गए। पुलिस द्वारा संकलित किए गए ठोस सबूतों और अभियोजन की मजबूत दलीलों के आगे आरोपी के बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा। सुनवाई पूरी होने के बाद माननीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी.) श्री जनार्दन खरे ने आरोपी कलेश्वर विश्वकर्मा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के कठोर कारावास से दंडित किया।
पुलिस प्रशासन का कड़ा संदेश : “महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति जशपुर पुलिस की नीति स्पष्ट रूप से ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण विवेचना, अदालत में प्रभावी अभियोजन तथा दोषियों को कठोरतम सजा दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। समाज में हर बेटी और महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जशपुर पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध और सजग है।”
डॉ. लाल उमेद सिंह, डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जशपुर




