अंबिकापुर

अंबिकापुर शासकीय अस्पताल में वसूली! मेडिकल सर्टिफिकेट के नाम पर ₹400 की पर्ची, आयुष्मान के दौर में गरीबों की जेब पर डाका…

  • मुख्यमंत्री से शुल्क शून्य करने की गुहार, सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की तैयारी; स्टाफ पर अभद्रता का आरोप…

सरगुजा। शासकीय अस्पतालों को ‘गरीबों का सहारा’ कहा जाता है, लेकिन अंबिकापुर के मुख्य शासकीय अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर पर्ची थमाने का खेल उजागर हुआ है। एक्स-रे, सोनोग्राफी से लेकर मेडिकल बोर्ड की प्रक्रियाओं तक के लिए मरीजों से बाकायदा शुल्क वसूला जा रहा है। हद तो तब हो गई जब अस्पताल परिसर में नोटिस चिपकाकर मेडिकल सर्टिफिकेट के एवज में ₹400 का फिक्स रेट तय कर दिया गया। इस ‘सरकारी दर’ को देखकर आम जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है।

“जब आयुष्मान योजना है, तो फिर यह सरकारी ‘टोल टैक्स’ क्यों?” – ​स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। नागरिकों का कहना है:

“एक तरफ प्रदेश सरकार ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं के जरिए हर गरीब को मुफ्त इलाज देने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी अस्पताल की चौखट लांघते ही हर जांच और मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।”

इलाज कम, बदसलूकी ज्यादा! – पीड़ित मरीजों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ का रवैया सहानुभूतिपूर्ण होने के बजाय बेहद अभद्र और अमानवीय है। दूर-दराज के गांवों से आए गरीब और लाचार मरीज जब शुल्क या प्रक्रियाओं पर सवाल उठाते हैं, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

सीएम हेल्पलाइन 1076 खटखटाने की तैयारी, मुख्यमंत्री से ‘ज़ीरो फीस’ की मांग – अस्पताल में जारी इस मनमानी के खिलाफ आम जनता ने मोर्चा खोल दिया है :

  • शिकायत की तैयारी : पीड़ित नागरिकों ने इस पूरे मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन (1076) में दर्ज कराने का फैसला किया है।
  • सीधा सवाल शासन से : जनता ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से सीधे गुहार लगाई है कि मेडिकल सर्टिफिकेट सहित सभी आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाओं के शुल्क की तत्काल समीक्षा की जाए और इन्हें पूर्णतः शून्य (₹0) घोषित किया जाए।

बड़ा सवाल : जवाबदेही किसकी? – अस्पताल परिसर में चिपका ₹400 का नोटिस और जांचों के नाम पर कट रही पर्चियां स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोल रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरगुजा स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन इस ‘वैध वसूली’ पर क्या लीपापोती करता है या फिर शासन स्तर से इस पर कोई कड़ा संज्ञान लिया जाता है।

संपादकीय टिप्पणी : समाचार में उल्लेखित शुल्कों के निर्धारण और अस्पताल कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार के आरोपों पर संबंधित अस्पताल प्रबंधन एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!