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नवपदस्थ एसपी किरण गंगाराम चव्हाण ने संभाला बालोद का जिम्मा

फिक्की अवार्ड से सम्मानित आईपीएस अधिकारी से सुरक्षा व बेहतर पुलिसिंग की उम्मीद

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा जनसहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय पुलिस सेवा के अनुभवी अधिकारी किरण गंगाराम चव्हाण (आईपीएस) ने कमान संभाल ली है। उन्होंने जिला पुलिस कार्यालय पहुंचकर निवर्तमान पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल से विधिवत प्रभार ग्रहण किया। नक्सल मोर्चे पर अदम्य साहस दिखाने और उत्कृष्ट पुलिसिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके श्री चव्हाण की इस तैनाती से जिले में सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी होने की उम्मीद है।

परिचयात्मक बैठक के साथ शुरुआत

पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद नए पुलिस अधीक्षक एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने जिला पुलिस कार्यालय के समस्त राजपत्रित अधिकारियों, विभिन्न थानों व चौकियों के प्रभारियों तथा विभागीय शाखा प्रमुखों की एक महत्वपूर्ण परिचयात्मक बैठक ली। इस बैठक में मौजूद अधिकारियों ने अपना परिचय देने के साथ ही अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, संवेदनशीलता और मौजूदा दायित्वों की विस्तृत जानकारी नए कप्तान के समक्ष साझा की।

इंजीनियरिंग से लेकर राष्ट्रीय सम्मान तक का सफर

मूल रूप से महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले से आने वाले किरण गंगाराम चव्हाण ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त की है। तकनीकी पृष्ठभूमि होने के बावजूद उन्होंने देश सेवा को चुना और कड़े संघर्ष के बाद संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण कर वर्ष 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी बने।

अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के कई चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में कार्य किया है। प्रशिक्षण के दौर में बिलासपुर में सेवाएं देने के बाद उन्होंने जगदलपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) तथा सुकमा जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशन) के रूप में अपनी धाक जमाई। इसके बाद वे सुकमा के ही एसपी बने। सुकमा में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने, नक्सल विरोधी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने और जनता के बीच पुलिस की छवि सुधारने के लिए उन्हें वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति द्वारा प्रतिष्ठित फिक्की अवार्ड ‘(FICCI Best Performing Officer)’ अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

पुलिस परिवार ने किया स्वागत

पदभार ग्रहण करने के इस विशेष अवसर पर बालोद के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने नए कप्तान का आत्मीय स्वागत किया। पुलिस परिवार ने उनके नेतृत्व में जिले में शांति, सुरक्षा और जनहितकारी कार्यों के एक नए और सफल अध्याय की शुरुआत होने की कामना व्यक्त की है।

स्वागत एवं परिचयात्मक बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मोनिका ठाकुर, एसडीओपी बालोद बोनिफास एक्का, एसडीओपी गुंडरदेही राजेश बागड़े, एसडीओपी गुरुर श्रीमती माया शर्मा, डीएसपी मुख्यालय श्रीमती श्रुति सिंह, सीएसपी राजहरा विकास पाटले, रक्षित निरीक्षक श्रीमती रेवती वर्मा समेत जिले के समस्त थाना प्रभारी एवं पुलिस कार्यालय बालोद के प्रभारी अधिकारी उपस्थित थे।

“किरण गंगाराम चव्हाण” भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 2018 बैच के एक बेहद होनहार और चर्चित अधिकारी हैं। बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में शामिल होने वाले किरण गंगाराम चव्हाण की कहानी युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है।

उनके कार्य, परिवार और सामाजिक स्तर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां निम्नलिखित हैं:

पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जीवन

मूल निवास व बचपन : किरण गंगाराम चव्हाण मूल रूप से महाराष्ट्र के कोल्हापूर जिले की चंदगड तहसील के नागनवाडी गांव के रहने वाले हैं। हालांकि, उनका परिवार मूल रूप से बीजापुर (कर्नाटक) से ताल्लुक रखता है।

पारिवारिक परिवेश : उनके घर का माहौल बेहद सादगी भरा रहा है। घर में ‘बंजारा’ भाषा बोली जाती है, लेकिन महाराष्ट्र में परवरिश होने के कारण वे मराठी परिवेश में पले-बढ़े।

कठिन संघर्ष : उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, उनके परिवार ने उनकी शिक्षा में पूरा सहयोग किया और किरण ने अपनी कड़ी मेहनत व लगन से हर चुनौती को पार किया।

कार्य और प्रशासनिक सेवा

किरण गंगाराम चव्हाण ने यूपीएससी की परीक्षा में दो बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपनी गलतियों से सीखकर सफलता हासिल की। वे 10-10 घंटे पढ़ाई करते थे और समाज को बदलने की नीयत से इस व्यवस्था का हिस्सा बने।

नक्सल मोर्चे पर बेहतरीन कार्य : छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में उनका कार्यकाल बेहद सराहनीय रहा। उनके नेतृत्व में चलाए गए अभियानों और सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर भारी संख्या में नक्सलियों (महिला नक्सलियों सहित) ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

पुनर्वास और कौशल विकास : वे केवल अपराधियों या नक्सलियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आत्मसमर्पण करने वाले भटके हुए युवाओं के लिए कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट), रोजगार और ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत घर दिलाने जैसे मानवीय कार्यों पर भी विशेष जोर दिया।

हालिया पदस्थापना : छत्तीसगढ़ शासन के प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें सुकमा से बालोद जिले का नया एसपी नियुक्त किया गया है।

सामाजिक स्तर और प्रभाव

युवाओं के रोल मॉडल : महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सबसे कठिन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था संभालने तक का उनका सफर उन्हें आज के युवाओं, विशेषकर ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा रोल मॉडल बनाता है।

संवेदनशील पुलिसिंग : वे एक ऐसे पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं जो बंदूक के दम पर नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और जनता के बीच विश्वास पैदा करके बदलाव लाने पर भरोसा रखते हैं। बंजारा समुदाय और ग्रामीण समाज में उनके इस मुकाम पर पहुंचने को बेहद गर्व के साथ देखा जाता है।

Feroz Ahmed Khan

संभाग प्रभारी : दुर्ग

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