चमत्कार या अटूट आस्था! गुप्त नवरात्रि में माँ दक्षिण काली मंदिर की अखंड ज्योत में उभरा माँ का दिव्य स्वरूप, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब..

रायपुर (छत्तीसगढ़)। कहते हैं जहाँ सच्ची श्रद्धा होती है, वहाँ ईश्वर स्वयं किसी न किसी रूप में अपनी उपस्थिति का अहसास करा ही देते हैं। ऐसा ही एक अलौकिक, विहंगम और आँखों को सजल कर देने वाला दृश्य राजधानी रायपुर के आमानाका स्थित ऐतिहासिक सिद्धपीठ माँ दक्षिण काली मंदिर में देखने को मिला। गुप्त नवरात्रि के पावन और रहस्यमयी अवसर पर, सोमवार को मंदिर परिसर में एक ऐसा दिव्य चमत्कार घटित हुआ, जिसने हज़ारों भक्तों के हृदय को असीम भक्ति और भाव-विभोरता से भर दिया।
अखंड ज्योत की लौ में दिखे माँ के दिव्य नेत्र – गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन, मंदिर के गर्भगृह में स्थापित मिट्टी के पावन कलश पर, त्रिशूल की छांव और आम के पत्तों के बीच प्रज्वलित अखंड दीपक की लौ ने एक अद्भुत स्वरूप ले लिया। देखते ही देखते, उस धधकती हुई पावन लौ में श्रद्धालुओं को साक्षात माँ महाकाली के करुणामयी और ओजस्वी नेत्रों की दिव्य आभा के दर्शन हुए।
जैसे ही इस अलौकिक दृश्य की भनक लोगों को लगी, पूरे मंदिर परिसर की ऊर्जा ही बदल गई। उपस्थित भक्तों के कंठ से स्वतः ही जयकारे फूट पड़े। देखते ही देखते पूरा वातावरण “जय माँ जगतजननी” और “जय माँ महाकाली” के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। भक्तों की आँखों से भक्ति के अश्रु बह निकले और हर कोई इस पल का साक्षी बनकर स्वयं को धन्य मानने लगा।
दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब, थमने का नाम नहीं ले रही कतारें – इस चमत्कारी और दिव्य घटना की खबर हवा की तरह पूरे शहर में फैल गई। सुबह की मंगल आरती के बाद से ही मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं बची है। बूढ़े, बच्चे, महिलाएं और युवा—हर कोई उस अखंड लौ में माँ की एक झलक पाने के लिए व्याकुल नजर आया।
”यह कोई साधारण लौ नहीं है, यह माँ का साक्षात आशीर्वाद है। गुप्त नवरात्रि में माँ ने हमें दर्शन देकर यह सिद्ध कर दिया कि वे अपने बच्चों के साथ हैं।”
भावुक होकर रो पड़े एक श्रद्धालु
बाल स्वरूप में विराजमान हैं माँ दक्षिण काली – इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ जगतजननी माँ महाकाली अपने ‘बाल स्वरूप’ में विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाल स्वरूप में माँ बेहद कृपालु और चंचल होती हैं, जो भक्तों की ज़रा सी निष्कपट भक्ति और पुकार पर तुरंत दौड़ी चली आती हैं। यही कारण है कि इस गुप्त नवरात्रि में माँ के इस चमत्कार को उनका विशेष लाड और आशीर्वाद माना जा रहा है।
गुप्त साधना के दिनों में माँ की विशेष कृपा – मंदिर के पूज्य पुजारियों ने बताया कि गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना, शक्ति उपासना और माँ की गुप्त शक्तियों की आराधना का सबसे उत्तम काल होता है। सोमवार को द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी और माँ काली की महापूजा के दौरान यह अद्भुत संयोग बना। शास्त्रों में वर्णित है कि इन दिनों की गई गुप्त साधना का फल अति शीघ्र मिलता है और माँ अपने बच्चों के सारे कष्ट, भय और जीवन की नकारात्मकता को पल भर में भस्म कर देती हैं।
नौ दिनों तक चलेगा महाअनुष्ठान – मंदिर समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि पूरे नौ दिनों तक यहाँ विशेष हवन, अनुष्ठान और गुप्त महाविद्याओं की पूजा जारी रहेगी। प्रतिदिन शाम को होने वाली दिव्य महाआरती के बाद भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया जा रहा है।
अखंड ज्योत का यह अलौकिक दृश्य आज हर भक्त के लिए अटूट विश्वास का केंद्र बन चुका है। विज्ञान भले ही इसे एक संयोग कहे, लेकिन माँ के दर पर शीश नवाने वाले भक्तों के लिए यह उनकी ‘मैया’ का साक्षात चमत्कार है, जिसने सनातन धर्म की महत्ता और भक्तों की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया है।




