सनसनीखेज खुलासा: लैलूंगा में राजस्व का ‘खेल’, चंद रुपयों में बिक गया ईमान? सीमांकन में पटवारी की भारी लापरवाही ने फूंक दी विवाद की आग!…

रायगढ़ (लैलूंगा)।न्याय के मंदिर और सरकारी आदेशों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील अंतर्गत ग्राम राजपुर (पटवारी हल्का नंबर 04) में देखने को मिल रहा है। जहां सालों पुराने कोर्ट ऑर्डर और स्पष्ट भू-अभिलेखों के बावजूद, राजस्व अमले की कथित ‘मिलीभगत’ और भारी लापरवाही ने एक सीधे-साधे जमीनी मामले को गहरा विवाद बना दिया है।
सवाल उठ रहा है कि आखिर कितने में बिके पटवारी साहब? जो आंखों के सामने मौजूद दस्तावेजों को दरकिनार कर सीमांकन के नाम पर केवल खानापूर्ति और भारी गड़बड़ी कर दी गई!
क्या है पूरा मामला? – ग्राम राजपुर में खसरा नंबर 263/575/1, 575/2 आदि जमीनों को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। इस मामले में पूर्व में भी तहसीलदार लैलूंगा और अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) घरघोड़ा के न्यायालयों द्वारा आदेश (जैसे वर्ष 2008 और 2012 के आदेश) पारित किए जा चुके हैं। हाल ही में न्यायालय तहसीलदार लैलूंगा द्वारा जनवरी 2026 में राजस्व निरीक्षक और पटवारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे स्थल पर जाकर नियमों के तहत, दोनों पक्षों को पूर्व सूचना देकर पूरी पारदर्शिता के साथ सीमांकन (Seemankan) की कार्रवाई संपन्न करें और फील्ड बुक के साथ प्रतिवेदन सौंपें।
लेकिन धरातल पर जो हुआ, उसने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है।
दस्तावेजों में कैद लापरवाही का कच्चा चिट्ठा – इस पूरे फर्जीवाड़े और लापरवाही को उजागर करते दो बेहद महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज सामने आए हैं:
- फाइल “1002644962.jpg”: इस फाइल में ग्राम राजपुर का प्रमाणित नजली नक्शा (नक्शा नज़री) देखा जा सकता है, जिसे बकायदा राजस्व अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया गया है। नक्शे में विभिन्न खसरा नंबरों की स्थिति दर्शाई गई है, लेकिन मौके पर इस नक्शे के अनुरूप सही तरीके से सरहदें तय करने के बजाय भारी घालमेल किया गया।
- फाइल “1002644974.jpg”: इस दस्तावेज में पटवारी हल्का नंबर 4 द्वारा तैयार किए गए खसरा नंबरों (263, 263/575/1, 2, 3, 4) और उनके रखबों का ब्यौरा साफ दर्ज है। इसमें कुल रकबा और हिस्सेदारों (आलोकरंजन, नीलमबाई, दिलबोध, गांडाराय) के नाम स्पष्ट हैं। इसके बावजूद सीमांकन के दौरान रकबे और वास्तविक कब्जे की नापजोख में भारी लापरवाही बरती गई, जिससे विवाद सुलझने के बजाय और अधिक उलझ गया।
बड़ा सवाल: जब उच्च न्यायालयीन प्रक्रियाओं और तहसील कार्यालय द्वारा कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, तो पटवारी और राजस्व टीम ने नियमों को ताक पर रखकर ऐसा त्रुटिपूर्ण सीमांकन क्यों किया? क्या यह महज ‘लापरवाही’ है या फिर इसके पीछे किसी मोटी रकम का खेल है?
पीड़ित पक्ष में आक्रोश, प्रशासन मौन! – राजस्व अमले की इस तानाशाही और घोर लापरवाही के कारण क्षेत्र के किसानों और भू-स्वामियों का सरकारी तंत्र से भरोसा उठता जा रहा है। नियमानुसार सीमांकन करने के बजाय, रसूखदारों को फायदा पहुंचाने की नीयत से कागजों में हेरफेर करने के आरोप लग रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि इस धारदार खुलासे के बाद रायगढ़ जिला प्रशासन और वरिष्ठ राजस्व अधिकारी इस लापरवाह पटवारी और संबंधित अमले पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर इस भ्रष्टाचार पर हमेशा की तरह पर्दा डाल दिया जाएगा!




