रायगढ़

लैलूंगा में सत्ता बदलते ही ‘बिचौलियों’ की पौ बारह : क्या भाजपा के सुशासन के दावे को पलीता लगा रहे हैं दलाल?…

भाग 3

लैलूंगा। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र में प्रशासनिक गलियारों और जन-सरोकार के दफ्तरों में एक बार फिर ‘दलाल राज’ सक्रिय होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सरकारी तंत्र में अपनी पैठ जमाने वाले इन बिचौलियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि आम जनता के काम अब बिना ‘नजराने’ और ‘सेटिंग’ के होना दूभर नजर आ रहे हैं।

दफ्तरों में बढ़ी सक्रियता, आम जनता पस्त : ​लैलूंगा के तहसील कार्यालय, जनपद और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में इन दिनों सफेदपोश दलालों का जमावड़ा साफ देखा जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि जो काम कायदे से होने चाहिए, उन्हें लटकाकर दलालों के जरिए फाइलें आगे बढ़ाने का खेल शुरू हो चुका है। सत्ताधारी दल के नाम की ओट लेकर ये बिचौलिए अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं।

सुशासन की मंशा पर उठ रहे सवाल : मुख्यमंत्री और सरकार की मंशा ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन’ देने की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। लैलूंगा की जनता अब यह सवाल पूछ रही है:

  • ​क्या सत्ता का लाभ केवल चंद दलालों को पहुँचाने के लिए हुआ था?
  • ​क्या विधायक और स्थानीय संगठन इन सक्रिय बिचौलियों पर लगाम कसने में नाकाम साबित हो रहे हैं?

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

प्रशासनिक अमला जहाँ चुप्पी साधे बैठा है, वहीं भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता भी दलालों के इस वर्चस्व से असहज महसूस कर रहे हैं। आम जनमानस का कहना है कि दलालों के बढ़ते दखल से न केवल काम की लागत बढ़ रही है, बल्कि शासन की छवि भी धूमिल हो रही है।

अगले भाग में लैलूंगा प्रेस क्लब अध्यक्ष – शेखर जायसवाल की विस्तृत कुंडली खोलेंगे… बने रहिये RM24 के साथ…

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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