रायपुर

हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: छत्तीसगढ़ में ‘विष्णु देव’ सरकार की श्रम क्रांति…

रायपुर। 1 मई, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने श्रमिकों के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई है। “हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान” के ध्येय वाक्य के साथ राज्य सरकार श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है।

800 करोड़ का सीधा लाभ और शिक्षा में नई पहल – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते 2 साल 4 माह के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों (DBT) में अंतरित की गई है। सरकार का विशेष जोर शिक्षा पर है; इसी कड़ी में इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के नामी निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाकर उनके भविष्य को नई दिशा दी जाएगी।

“अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा” – श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने सरकार के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि सुशासन की इस सरकार में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि बजट 2026-27 में श्रम विभाग के लिए 256 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:

  • मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना
  • मिन्नीमाता महतारी जतन योजना
  • मुख्यमंत्री श्रमिक आवास सहायता योजना: सहायता राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की गई।
  • ई-रिक्शा सहायता: अनुदान राशि 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये करने का निर्णय।
  • शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना: श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में गर्म भोजन। अब इसका विस्तार सभी जिलों में किया जा रहा है।

तकनीक से सुरक्षा और स्वास्थ्य पर जोर – मुख्यमंत्री ने औद्योगिक इकाइयों के औचक निरीक्षण के लिए तकनीक के उपयोग के निर्देश दिए हैं ताकि श्रमिकों के अधिकारों का हनन न हो। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए इस वर्ष 10 करोड़ रुपये और कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के लिए 76.38 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है, ताकि श्रमिकों और उनके परिजनों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।

आंकड़ों में श्रम कल्याण की झलक :

  • पंजीकृत श्रमिक: 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक।
  • कुल उपकर (सेस) संग्रहण: अब तक 2,808 करोड़ रुपये।
  • योजनाओं पर व्यय: मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
  • भोजन केंद्र: वर्तमान में 38 केंद्रों पर 5 रुपये में भोजन उपलब्ध।

श्रमिक दिवस का गौरवशाली इतिहास – समाचार के माध्यम से श्रमिकों को याद दिलाया गया कि 1 मई का दिन 1886 के शिकागो संघर्ष और डॉ. भीमराव अंबेडकर के उन प्रयासों का सम्मान है, जिन्होंने कार्य के घंटे 12 से घटाकर 8 किए और महिलाओं को प्रसूति अवकाश का अधिकार दिलाया। छत्तीसगढ़ सरकार इन्हीं पदचिह्नों पर चलते हुए ‘अंत्योदय’ के लक्ष्य को प्राप्त कर रही है।

“हमारी सरकार की आदर्श नीति है कि हर हाथ को काम मिले, उसे उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले।”

श्री लखनलाल देवांगन, श्रम मंत्री, छत्तीसगढ़

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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