BREAKING : दुर्ग पुलिस की ‘काली करतूत’ का पर्दाफाश? वर्दी के पीछे ‘किडनैपिंग’ और ‘कट्टे’ वाली साजिश!…

दुर्ग। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को हिला देने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने खाकी की चमक को धुंधला कर दिया है। दुर्ग SP विजय अग्रवाल और उनकी ‘स्पेशल टीम’ पर किसी अपराधी ने नहीं, बल्कि एक आम नागरिक ने सरेआम किडनैपिंग, डकैती और एनकाउंटर की धमकी देने का सीधा और घातक आरोप मढ़ा है!

सनसनीखेज वारदात : ‘बीच सड़क से उठाया, कनपटी पर रखी पिस्टल’ – शिकायतकर्ता उज्जवल दीवान के दावों ने शासन-प्रशासन के पैरों तले जमीन खिसका दी है।
- क्या पुलिस अब गुंडागर्दी पर उतर आई है? आरोप है कि 19 अप्रैल को जब दीवान पैदल यात्रा पर निकले थे, तो उन्हें ‘क्राइम ब्रांच’ की तरह घेरा गया और काली फिल्म लगी बोलेरो में ठूंस दिया गया।
- पिस्टल की नोंक पर वसूली : गाड़ी के भीतर पीड़ित की कनपटी पर पिस्टल सटाकर कहा गया – “SP साहब का आदेश है, तुझे जिंदा नहीं छोड़ना है!” आरोप है कि पुलिसवालों ने न केवल जान से मारने की धमकी दी, बल्कि पीड़ित की जेब से 5000 रुपये भी लूट लिए।
खाकी का ‘तानाशाह’ चेहरा: निर्दोष पुलिसकर्मी भी त्रस्त? – यह सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं दिख रही। शिकायत पत्र में दुर्ग पुलिस के भीतर मचे ‘विद्रोह’ की गूंज सुनाई दे रही है:
- आतंक का शासन : SP विजय अग्रवाल पर आरोप है कि वे अपने ही विभाग के आरक्षकों और निरीक्षकों को ‘मानसिक अवसाद’ (Depression) की कगार पर ले आए हैं।
- बिना जांच सजा : बेगुनाह पुलिसकर्मियों को अपनी ‘आत्मसंतुष्टि’ के लिए प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे जिले की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
- सबूत मिटाने की कोशिश : उज्जवल दीवान का दावा है कि उनके पास SP के भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत थे, जिसे लूटने के लिए यह पूरा ‘किडनैपिंग ड्रामा’ रचा गया।
CCTV खोलेगा राज : क्या फंसेगा पुलिस महकमा? – शिकायतकर्ता ने सीधे गृह मंत्री को चुनौती दी है कि सुपेला चौक से लेकर जेल परिसर तक के CCTV फुटेज खंगाले जाएं।
“अगर पुलिस पाक-साफ है, तो फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते? ट्रैफिक सिग्नल तोड़कर भागती वो बोलेरो किसकी थी?” — यह सवाल आज पूरे दुर्ग की जनता पूछ रही है।
बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं :
- क्या दुर्ग जिले में ‘कानून का राज’ है या ‘साहब का राज’?
- एक आम नागरिक को उठाने के लिए DSP स्तर के अधिकारियों की टीम क्यों भेजी गई?
- क्या गृह मंत्री अपने ही विभाग के ‘दागी’ अफसर पर कार्रवाई की हिम्मत दिखाएंगे?
‘धारदार’ विशेष टिप्पणी:
यह शिकायत केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि पुलिसिया तंत्र के सड़ चुके हिस्से का एक्सरे है। अगर एक SP स्तर का अधिकारी खुद को ‘कानून से ऊपर’ समझने लगे, तो आम आदमी न्याय के लिए किसके पास जाएगा? मुख्यमंत्री जी, अब आपकी बारी है – न्याय होगा या लीपापोती?
पूर्व में प्रकाशित खबर :




