जमीन के चंद टुकड़ों के लिए भाई बना हत्यारा : तमनार के ‘कलयुगी’ बड़े भाई को मिली उम्रकैद…

रायगढ़। रिश्तों के कत्ल और जमीनी लालच की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात में न्याय का बड़ा फैसला आया है। रायगढ़ जिले के अपर सत्र न्यायालय (घरघोड़ा) ने अपने ही सगे छोटे भाई की टांगी से काटकर हत्या करने वाले आरोपी सोनसाय राठिया को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश अभिषेक शर्मा के इस फैसले ने समाज में कड़ा संदेश दिया है कि अपराध की जड़ें कितनी भी गहरी क्यों न हों, कानून का हाथ उन तक पहुँचकर ही रहता है।
विवाद की पृष्ठभूमि : रिश्तों पर भारी पड़ा जमीनी मोह – यह खूनी संघर्ष तमनार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गाँव का है, जहाँ वर्षों से साथ रहने वाले दो भाइयों के बीच जमीन की बिक्री को लेकर कड़वाहट पैदा हो गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह जमीन बेचने की जिद और आपसी सहमति का न होना था।
तारीख : 20 जनवरी 2021
समय : दोपहर 3:00 से 4:00 बजे के बीच
स्थान : मृतक मनबोध राठिया का निवास
वारदात का खौफनाक मंजर : घटना वाले दिन मृतक का बेटा प्रेम साय राठिया किसी काम से घर से बाहर गया हुआ था। घर पर उसके पिता मनबोध राठिया, भतीजा हेम कुमार और अवन्ति राठिया मौजूद थे। इसी बीच बड़ा भाई सोनसाय राठिया वहाँ पहुँचा और जमीन की बिक्री को लेकर फिर से पुरानी बहस छिड़ गई।
बातचीत गाली-गलौज से शुरू होकर हाथापाई तक पहुँच गई। गुस्से में पागल होकर सोनसाय ने पास ही रखी एक धारदार टांगी (कुल्हाड़ी) उठा ली और आव देखा न ताव, सीधे अपने छोटे भाई मनबोध के गले पर जोरदार प्रहार कर दिया। प्रहार इतना घातक था कि मनबोध की गर्दन कट गई और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और साक्ष्यों का संकलन – शाम को जब बेटा घर लौटा, तो पिता की रक्तरंजित लाश देख उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। तमनार थाने में दी गई शिकायत के बाद पुलिस तत्काल हरकत में आई।
- जांच अधिकारी : तत्कालीन उप निरीक्षक चक्र सुदर्शन जायसवाल ने घटनास्थल का मुआयना किया।
- वैज्ञानिक साक्ष्य : पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त टांगी को जब्त किया और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए।
- कानूनी प्रक्रिया : आरोपी के खिलाफ धारा 302 (IPC) के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेजा गया।
अदालत का फैसला : आजीवन कारावास और जुर्माना – घरघोड़ा स्थित अपर सत्र न्यायालय में इस मामले की लंबी सुनवाई चली। न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। गवाहों के बयानों और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह साबित हो गया कि सोनसाय राठिया ने ही अपने भाई की हत्या की है।
न्यायालय ने निम्नलिखित सजा सुनाई :
- आजीवन कारावास: आरोपी को मरते दम तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा।
- अर्थदंड: आरोपी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में सजा की अवधि और बढ़ाई जा सकती है।
यह घटना न केवल एक परिवार के बिखरने की कहानी है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि कैसे क्षणिक आवेश और संपत्ति का लालच हँसते-खेलते परिवारों को श्मशान और जेल की सलाखों तक पहुँचा देता है। तमनार पुलिस की पेशेवर जांच और न्यायपालिका के इस सख्त रुख की क्षेत्र में सराहना हो रही है।




