बलरामपुर : अस्पताल बना ‘वसूली केंद्र’, अपमान के खिलाफ दहलीज पर धरने पर बैठा पत्रकार!…

बलरामपुर। जिले के वाड्रफनगर सिविल अस्पताल से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने शासन-प्रशासन के ‘मुफ्त इलाज’ के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जहाँ एक घायल मरीज की मदद करना तो दूर, अस्पताल के कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार की ऐसी नजीर पेश की कि एक पत्रकार को न्याय के लिए अस्पताल की चौखट पर ही धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ा।
क्या है पूरा मामला? – मिली जानकारी के अनुसार, सीतापुर निवासी एक युवक (जो कुर्लुडीह शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं) को आवारा कुत्ते ने बुरी तरह काट लिया था। मानवता का परिचय देते हुए स्थानीय पत्रकार विजयलाल मरकाम घायल युवक को तत्काल इलाज के लिए वाड्रफनगर सिविल अस्पताल लेकर पहुँचे।
लेकिन अस्पताल की दहलीज पर कदम रखते ही ‘इंसानियत’ का गला घोंट दिया गया। आरोप है कि :
- अवैध वसूली : काउंटर पर तैनात कर्मचारी कुशवाहा ने पर्ची काटने के एवज में 150 रुपये की मांग की।
- पद का अहंकार : जब पत्रकार ने इस अवैध वसूली का विरोध किया और चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत दीक्षित को फोन लगाया, तो कर्मचारी ने फोन को टेबल पर पटक दिया और अभद्रता की।
सिस्टम के खिलाफ आधी रात को ‘जंग’ – अपमान और भ्रष्टाचार से आहत होकर पत्रकार विजयलाल मरकाम रात को ही अस्पताल के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते अस्पताल परिसर हंगामे के अखाड़े में तब्दील हो गया।
- 2 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा : देर रात तक चले इस प्रदर्शन ने अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए।
- पुलिस की दस्तक : सूचना मिलते ही वाड्रफनगर चौकी पुलिस मौके पर पहुँची। अंततः थाना बसंतपुर प्रभारी जितेन्द्र सोनी की समझाइश और मामले की निष्पक्ष जांच के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ।
गंभीर सवाल : जो पत्रकार के साथ हुआ, वो आम जनता के साथ क्या होता होगा? – इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं :
- नियम का हवाला : आखिर किस सरकारी नियम के तहत पर्ची के लिए 150 रुपये वसूले जा रहे थे?
- निरंकुश कर्मचारी : एक डॉक्टर का फोन टेबल पर फेंकने का साहस कर्मचारी के पास कहाँ से आया? क्या उसे बड़े अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है?
- आम आदमी की बिसात क्या : जब एक सजग पत्रकार के साथ अस्पताल में ऐसा दुर्व्यवहार हो सकता है, तो दूर-दराज से आने वाले अनपढ़ और गरीब ग्रामीणों की क्या स्थिति होती होगी?
“सवाल महज 150 रुपये का नहीं है, सवाल उस दूषित मानसिकता का है जो एक घायल मरीज के दर्द से ज्यादा अपनी जेब गरम करने को प्राथमिकता देती है।”
अब गेंद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के पाले में है। क्या इस भ्रष्ट सिस्टम पर चाबुक चलेगा, या हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? वाड्रफनगर की जनता अब जवाब और कार्रवाई दोनों का इंतजार कर रही है।




