लैलूंगा में नौनिहालों के भविष्य पर ‘भ्रष्टाचार’ का पहरा, क्या सो रहा है महिला एवं बाल विकास विभाग?…

रायगढ़ | लैलूंगा (ग्राम पंचायत डोरोबिजा) : सरकारें कागजों पर कुपोषण मुक्त भारत का सपना देख रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड में दम तोड़ रही है। यहाँ के ग्राम पंचायत डोरोबिजा (बरटोली) में आंगनबाड़ी केंद्र पिछले 18 महीनों से बंद है। यह किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि एक हठधर्मी कार्यकर्ता और पंगु हो चुके प्रशासनिक तंत्र की वजह से है।

तमाशा बन गए विभागीय नोटिस – हैरानी की बात यह है कि विभाग ने मीडिया में खबरें आने के बाद ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल तो खेला, लेकिन धरातल पर ताला नहीं खुलवा सका। 1.5 साल से एक कार्यकर्ता पूरे विभाग को ठेंगा दिखा रही है और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजों का पेट भर रहे हैं।
बड़ा सवाल : क्या एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का रसूख इतना बड़ा है कि पूरा जिला प्रशासन उसके सामने नतमस्तक है? या फिर इस लापरवाही के पीछे “साहबों” की मिलीभगत का मोटा हिस्सा शामिल है?
⚠️ बच्चों के निवाले पर ‘सिस्टम’ की डकैती –
आंगनबाड़ी सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और उनकी प्रारंभिक शिक्षा की नींव होती है। बरटोली में पिछले 18 महीनों से:
- पोषण आहार : बच्चों को मिलने वाला गरम भोजन और रेडी-टू-ईट गायब है।
- टीकाकरण : स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को नहीं मिल पा रहा।
- शिक्षा : बच्चों के भविष्य की नींव रखने वाली स्लेट और पेंसिल पर धूल जमी है।
ग्रामीणों का आक्रोश : “अब नोटिस नहीं, न्याय चाहिए”– ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर इस मामले को लटका रहा है। ग्रामीणों ने तीखे लहजे में कहा है— “अगर 18 महीने में कार्रवाई नहीं हुई, तो क्या विभाग कार्यकर्ता के रिटायर होने का इंतजार कर रहा है?” क्षेत्र की जनता ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और जल्द ही उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
निशाने पर ‘जिम्मेदार’ : 3 तीखे सवाल –
- कलेक्टर साहब गौर करें : क्या 18 महीने की अनुपस्थिति सेवा समाप्ति के लिए पर्याप्त आधार नहीं है? आखिर किसे बचाने की कोशिश हो रही है?
- परियोजना अधिकारी की भूमिका : नोटिस के बाद भी केंद्र नहीं खुला, तो क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर ताला तोड़ने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की जहमत उठाई?
- वेतन का खेल : क्या बंद केंद्र की कार्यकर्ता को पिछले 18 महीनों का मानदेय भुगतान किया गया है? यदि हाँ, तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन का गबन है।
डोरोबिजा का यह बंद पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है। जहाँ बच्चों की हंसी गूंजनी चाहिए थी, वहां पसरा सन्नाटा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर चीख-चीख कर सवाल पूछ रहा है।
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद विभाग की नींद टूटती है या फिर बरटोली के बच्चे इसी तरह व्यवस्था की भेंट चढ़ते रहेंगे।




