रायगढ़ : शिक्षा के मंदिर में ‘नकल का काला बाजार’, खरसिया के बर्रा केंद्र में 12 हजार तक वसूली का आरोप

रायगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की परीक्षाओं के बीच रायगढ़ जिले के खरसिया से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विकासखंड के बर्रा ओपन परीक्षा केंद्र पर शिक्षा की मर्यादा को ताक पर रखते हुए भारी धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि केंद्र में परीक्षा दिलाने के नाम पर छात्रों से 8 हजार से 12 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है।
पैसा नहीं देने पर छात्रों को परीक्षा से रोका – मामले ने तूल तब पकड़ा जब 1 अप्रैल को परीक्षा देने पहुँचे 7 छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया। पीड़ित छात्रों का आरोप है कि उन्होंने मैनेजमेंट द्वारा मांगी गई ‘सुविधा शुल्क’ (नकल के लिए रकम) देने से इनकार कर दिया था, जिसके प्रतिशोध में उन्हें परीक्षा केंद्र से बाहर कर दिया गया। इस घटना के बाद केंद्र पर भारी हंगामा हुआ और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जिम्मेदारों पर लगे गंभीर आरोप – छात्रों ने सीधे तौर पर केंद्र के शीर्ष प्रबंधन को इस भ्रष्टाचार का सूत्रधार बताया है। आरोपों के घेरे में मुख्य रूप से तीन नाम शामिल हैं:
- ज्ञानसागर राठिया (केंद्राध्यक्ष)
- रामधन राठिया (सहायक केंद्राध्यक्ष)
- रामगोपाल राठिया (प्रभारी प्राचार्य)
छात्रों का दावा है कि जो पैसे दे रहे हैं, उन्हें न केवल नकल की पर्चियां मुहैया कराई जा रही हैं, बल्कि बाहरी लोगों से उत्तर पुस्तिकाएं लिखवाने जैसी अनैतिक गतिविधियां भी धड़ल्ले से चल रही हैं।
उड़नदस्ता टीम की जांच और प्रशासन का पक्ष : इस बड़े खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। खरसिया बीईओ (Block Education Officer) लक्ष्मीनारायण पटेल ने मीडिया से चर्चा में स्वीकार किया कि बर्रा हाई स्कूल में अनियमितता की शिकायतें मिली हैं।
”बर्रा केंद्र में ओपन परीक्षा के दौरान गड़बड़ी की सूचना मिली है। हमारी उड़नदस्ता टीम पिछले दो दिनों से वहां जांच के लिए जा रही है। हम आने वाली परीक्षाओं में भी कड़ी निगरानी रखेंगे। यदि नकल या अवैध वसूली की पुष्टि होती है, तो केंद्राध्यक्ष और संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
लक्ष्मीनारायण पटेल, बीईओ खरसिया
मुख्य बिंदु : पारदर्शिता पर उठते सवाल –
- नकल का रेट कार्ड : छात्रों के अनुसार नकल कराने के लिए 8,000 से 12,000 रुपये तक की डिमांड की गई।
- प्रतिशोध की कार्रवाई : पैसे न देने पर 7 छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया गया।
- सुरक्षा में सेंध : बाहरी लोगों द्वारा उत्तर पुस्तिका लिखे जाने के आरोप परीक्षा की शुचिता को पूरी तरह ध्वस्त करते हैं।
विशेष टिप्पणी : यह मामला केवल एक केंद्र का नहीं, बल्कि उन हजारों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है जो ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करते हैं। क्या प्रशासन केवल ‘जांच’ का आश्वासन देगा या इन ‘शिक्षा माफियाओं’ पर कोई बड़ी कार्रवाई होगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।




