रायगढ़

रायगढ़ : बिचौलियों और कतारों का अंत, अब एक क्लिक पर किसानों के बैंक खाते में बरस रहा मुआवज़ा…

रायगढ़। जिला प्रशासन ने ‘सुशासन से सशक्तिकरण’ के मंत्र को धरातल पर उतारते हुए भू-अर्जन मुआवजा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब किसानों को अपनी ही जमीन के हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने और चेक क्लियरेंस के लिए हफ्तों इंतजार करने की जरूरत नहीं है। डिजिटल इंडिया की धमक अब सीधे किसानों के खातों में सुनाई दे रही है।

आंकड़े जो गवाही दे रहे हैं (30 मार्च 2026 तक की स्थिति) – डिजिटल भुगतान की इस नई व्यवस्था ने महज कुछ ही महीनों में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं:

  • कुल लाभांवित किसान : 463
  • कुल हस्तांतरित राशि : ₹15,49,71,225 (15.49 करोड़ से अधिक)
  • मुआवजा राशि : ₹9,82,45,952 (156 किसानों को)
  • पुनर्वास एवं बोनस : ₹5,67,25,273 (307 किसानों को)

‘चेक’ के चक्रव्यूह से मिली आजादी : पुरानी व्यवस्था में चेक जारी होने से लेकर बैंक में जमा करने और राशि खाते में आने तक की प्रक्रिया ‘लालफीताशाही’ और देरी का शिकार रहती थी। रायगढ़ अनुविभाग में 26 सितंबर 2025 से लागू इस नई ऑनलाइन व्यवस्था ने :

  • बिचौलियों की गुंजाइश खत्म की : सीधे बैंक खाते (DBT) में पैसा जाने से भ्रष्टाचार की राह बंद हुई।
  • समय की बचत : बैंक और तहसील के चक्कर काटने का झंझट खत्म।
  • पारदर्शिता : हर भुगतान का डिजिटल ट्रेल (Record) उपलब्ध, जिससे जवाबदेही तय हुई।

किसानों की जुबानी : “अब सम्मान और समाधान दोनों साथ” – प्रशासन की इस पहल पर किसानों ने मुहर लगा दी है:

“पहले चेक के लिए परेशान होना पड़ता था, अब सीधे मोबाइल पर मैसेज आता है कि पैसा आ गया। यह प्रक्रिया बेहद सरल और तेज है।”श्री राजकुमार चौधरी, ग्राम उच्चभिट्टी

“ऑनलाइन व्यवस्था ने हमें भटकने से बचा लिया। समय पर पैसा मिलना ही हमारे लिए सबसे बड़ी राहत है।”श्री उपेन्द्र पटेल, ग्राम जामपाली

सुशासन की नई परिभाषा – यह महज एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासन के प्रति जनता के ‘भरोसे का अपग्रेड’ है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से त्रुटियों की संभावना शून्य हो गई है और प्रशासनिक दक्षता में कई गुना वृद्धि हुई है। रायगढ़ का यह सफल प्रयोग पूरे प्रदेश के लिए डिजिटल सशक्तिकरण की एक मिसाल बन गया है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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