अंबिकापुर

मैनेपाट के जंगलों में ‘करंट का कत्लखाना’ : शिकारियों ने बिछाया था 11,000 वोल्ट का डेथ-ट्रैप, ग्रामीण की दर्दनाक मौत!…

सरगुजा (मैनेपाट)। शिकारियों के ‘खूनी लालच’ ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनेपाट के जंगलों में वन्यजीवों के शिकार के लिए बिछाया गया 1300 मीटर लंबा मौत का तार एक बेगुनाह ग्रामीण के लिए काल बन गया। 11KV की हाई-टेंशन लाइन से जुड़े इस ‘लाइव वायर’ ने न केवल एक सियार को भून डाला, बल्कि ग्राम मुड़गिडीह निवासी मिसर यादव को भी तड़पा-तड़पा कर मार डाला।

सनसनीखेज खुलासा : 1.3 किलोमीटर लंबा ‘किलर नेटवर्क’ – वन विभाग की जांच में जो मंजर सामने आया, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। शिकारियों ने जंगल के बीचों-बीच किसी प्रोफेशनल की तरह 1.3 किलोमीटर लंबा जीआई तार फैला रखा था।

  • सीधा वार : तार को सीधे 11,000 वोल्ट की विद्युत लाइन से जोड़ा गया था।
  • अदृश्य मौत : घने जंगलों और झाड़ियों के बीच बिछा यह तार इंसान की नसों को राख करने के लिए काफी था।
  • डबल मर्डर : इस करंट ने जहाँ एक जंगली सियार को ढेर किया, वहीं अनजाने में वहां से गुजर रहे मिसर यादव की मौके पर ही मौत हो गई।

वन विभाग की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : सलाखों के पीछे 6 शिकारी – घटना की भनक लगते ही वनमंडलाधिकारी और उपवनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में वन अमले ने मोर्चा संभाला। महज कुछ घंटों की सघन जांच और घेराबंदी के बाद 6 नरभक्षी सोच वाले शिकारियों को दबोच लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों का ‘काला चिट्ठा’ :

  • जहर (70 वर्ष) – उम्र का तकाजा भी नहीं, साजिश में शामिल।
  • जयपाल (45 वर्ष)
  • निर्मल कुजूर (65 वर्ष)
  • घुरसाय (38 वर्ष)
  • विश्वनाथ (46 वर्ष)
  • श्यामसुंदर (25 वर्ष)

कानून का शिकंजा : नहीं बचेंगे अपराधी! – इन सभी आरोपियों को कमलेश्वरपुर थाना लाया गया है, जहाँ इनके खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और संशोधन अधिनियम 2002 की संगीन धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी इस तरह के ‘खूनी खेल’ खेले हैं।

तीखा सवाल : कब थमेगा यह ‘सफेदपोश’ शिकार? – ​मैनेपाट की ये घटना चीख-चीख कर कह रही है कि जंगल अब सुरक्षित नहीं हैं। चंद रुपयों के मांस और खाल के लिए 11,000 वोल्ट का करंट बिछाने वाले ये लोग समाज के लिए किसी आतंकी से कम नहीं हैं। आज एक सियार और एक ग्रामीण की जान गई है, कल कोई और भी इसका शिकार हो सकता है।

“शिकारियों की ये करतूत सिर्फ वन्यजीवों पर हमला नहीं, बल्कि मानवता का कत्ल है।” – वन विभाग के सूत्रों का कड़ा संदेश।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!