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‘अदालत नहीं, समाधान केंद्र बनें फैमिली कोर्ट’ : CJI सूर्यकांत का मानवीय न्याय की ओर बड़ा आह्वान…

नई दिल्ली | देश की न्याय व्यवस्था में एक युगांतरकारी बदलाव का संकेत देते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए एक पूरी तरह से नई और संवेदनशील अवधारणा पेश की है। रोहिणी में नए फैमिली कोर्ट की आधारशिला रखते हुए CJI ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक अदालतों को संपत्ति विवाद वाली अदालतों की तरह नहीं, बल्कि ‘पारिवारिक समाधान केंद्रों’ के रूप में काम करना चाहिए।

काले चोगे और वर्दी पर प्रहार : “खत्म हो मनोवैज्ञानिक डर” – ​CJI सूर्यकांत ने अदालती कामकाज के पारंपरिक और सख्त ढांचे पर सवाल उठाते हुए वकीलों और जजों की वेशभूषा में बड़े बदलाव का सुझाव दिया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु रहे:

  • नो यूनिफॉर्म पॉलिसी : CJI ने सुझाव दिया कि फैमिली कोर्ट के पीठासीन अधिकारी और बार के सदस्य काले-सफेद चोगे (गाउन) पहनकर न आएं।
  • वर्दी मुक्त पुलिस : उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी वर्दी में आने की जरूरत नहीं है, ताकि बच्चों के मन से ‘सिस्टम’ का डर खत्म किया जा सके।
  • बच्चों की मानसिक सुरक्षा : CJI के अनुसार, बच्चे अक्सर विवादों के सबसे बड़े शिकार होते हैं। एक औपचारिक अदालती माहौल उनके मन में गहरा मनोवैज्ञानिक डर पैदा करता है, जिसे बदलना अनिवार्य है।
  • मानवीय दृष्टिकोण : उन्होंने प्रस्तावित किया कि क्या हम इन अदालतों को ‘पारिवारिक समाधान केंद्र’ कह सकते हैं?
  • साझा जिम्मेदारी : उन्होंने याद दिलाया कि यहाँ विवाद बेजान संस्थाओं के बीच नहीं, बल्कि उन लोगों के बीच हैं जो कभी साथी थे और आज भी माता-पिता के रूप में साझा जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

बुनियादी ढांचे की चुनौती : बजट, कर्मचारी और जगह – ​कार्यक्रम में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनमोहन ने दिल्ली की न्यायपालिका के सामने खड़ी तीन प्रमुख चुनौतियों को रेखांकित किया:

  • बजट : वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता।
  • कर्मचारी : पर्याप्त मैनपावर की कमी।
  • जगह : कोर्ट रूम और जजों के रहने के लिए आवासीय व्यवस्था की किल्लत।

​इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय ने भी न्यायिक सुधारों और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर अपनी बात रखी।

CJI का यह बयान न्यायपालिका को ‘दंडात्मक’ छवि से निकालकर ‘सुधारात्मक’ और ‘मानवीय’ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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