खाकी पर दाग : रमेश चौहान की मौत से सुलगा रायगढ़; नेशनल हाईवे पर आक्रोश का तांडव, प्रशासन ने टेके घुटने…

रायगढ़। जिले की खरसिया के ग्राम परसकोल में रमेश चौहान की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र को आक्रोश की आग में झोंक दिया है। पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोपों और ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। गुरुवार को एसडीएम कार्यालय से लेकर नेशनल हाईवे तक हुए भारी बवाल के बाद सरकार ने न केवल मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि आरोपी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरते हुए उन्हें लाइन अटैच कर दिया है।
सड़क पर संग्राम : जब विधायक और ग्रामीणों ने रोका पहिया – घटना की चिंगारी तब भड़की जब गुरुवार शाम करीब 4:30 बजे सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ‘पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। आक्रोश इतना गहरा था कि शाम 7 बजे ग्रामीण बोतल्दा चौक स्थित नेशनल हाईवे पर धरने पर बैठ गए।
क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी ने आंदोलन को और राजनीतिक धार दे दी। हाईवे पर घंटों चक्काजाम रहने से प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। ग्रामीणों की मांग स्पष्ट थी:
- दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई।
- पूरे मामले की निष्पक्ष मजिस्ट्रियल जांच।
- पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और उचित मुआवजा।
प्रशासन की ‘डैमेज कंट्रोल’ कार्रवाई – देर रात तक चली खींचतान और कानून व्यवस्था बिगड़ने के डर से प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए ग्रामीणों की मांगों पर मुहर लगा दी।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु :
- मजिस्ट्रियल जांच : मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए मजिस्ट्रियल जांच का आधिकारिक आदेश जारी।
- पुलिस पर गाज : थाना प्रभारी समेत दो पुलिसकर्मियों (विसोप सिंह एवं योगेश साहू) को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है।
- नौकरी का आश्वासन : मृतक के परिजन को कलेक्टर दर पर शासकीय सेवा में रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्या था मामला? – ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि रमेश चौहान की जान पुलिस की बेरहमी और प्रताड़ना की वजह से गई है। हालांकि, जिला प्रशासन ने अब निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। सवाल अब भी बरकरार है कि क्या ‘लाइन अटैच’ की यह कार्रवाई केवल गुस्से को शांत करने के लिए है, या रमेश के परिवार को सच में न्याय मिलेगा?
“प्रशासन निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जा रही है।” – प्रशासनिक वक्तव्य
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