रायगढ़

बजट या विश्वासघात? ‘ज्ञान और गति’ के शोर में दम तोड़ती स्वास्थ्य वीरों की उम्मीदें; 17,500 परिवारों के भविष्य पर सरकार का ‘मौन’ प्रहार…

विशेष रिपोर्ट। रायगढ़। 25 फरवरी 2026। छत्तीसगढ़ सरकार का साल 2026 का बजट ‘चमकदार शब्दों’ और ‘ऊंचे नारों’ की चादर में लिपटा हुआ नजर आ रहा है, लेकिन इस चादर के नीचे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़-  17,500 NHM संविदा कर्मचारी–  उपेक्षा की कड़वाहट घोंटने को मजबूर हैं। “ज्ञान का उत्थान” और “गति की शक्ति” जैसे भारी-भरकम जुमलों के बीच उन स्वास्थ्य योद्धाओं का जिक्र तक न होना, जिन्होंने अपनी जान हथेली पर रखकर छत्तीसगढ़ को महामारी से उबारा था, सरकार की संवेदनशीलता पर गहरा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

‘मोदी की गारंटी’ की एक्सपायरी डेट? – ​NHM कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव कौशलेस तिवारी ने सरकार की दुखती रग पर हाथ रखते हुए पूछा है कि क्या ‘मोदी की गारंटी’ केवल चुनाव जीतने का एक ‘टूल’ मात्र थी?

  • सितंबर 2025 का वो वादा: 19 सितंबर 2025 को स्वास्थ्य मंत्री ने सार्वजनिक रूप से 3 महीने के भीतर मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था।
  • आज की हकीकत: 5 महीने बीत जाने के बाद भी बजट में ग्रेड पे, एचआर पॉलिसी और चिकित्सा बीमा जैसे शब्दों का ‘अकाल’ पड़ा हुआ है।

‘रीढ़’ तोड़ती सरकारी खामोशी : ​संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरि का कहना है कि बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि जनता और कर्मचारियों के प्रति सरकार की नियत का आईना होता है।

​”अगर 17,500 कर्मचारी मानसिक तनाव और आर्थिक असुरक्षा में जिएंगे, तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में ‘गति’ कैसे आएगी? यह बजट ‘ज्ञान’ का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के साथ किए गए ‘छलावे’ का दस्तावेज है।”

‘स्वास्थ्य योद्धा’ से ‘हाशिए के मजदूर’ तक का सफर : ​प्रांतीय प्रवक्ता पूरन दास ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार को शायद वह समय भूल गया है जब इन्ही NHM कर्मचारियों ने पीपीई किट पहनकर अपनों से दूर रहकर प्रदेश की सेवा की थी। आज जब हक देने की बारी आई, तो सरकार ने उन्हें ‘अनुपूरक बजट’ और ‘आश्वासनों की टोकरी’ में डाल दिया है।

कठघरे में सरकार : 3 बड़े सवाल जिनका जवाब प्रदेश मांग रहा है

आंदोलन की सुगबुगाहट: अब आर-पार की जंग? – रायगढ़ जिलाध्यक्ष सुश्री शकुंतला एक्का ने स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारी अब और ‘मीठी गोलियों’ से बहलने वाले नहीं हैं। बजट में हुई इस ऐतिहासिक अनदेखी ने कर्मचारियों के भीतर आक्रोश की ज्वाला भड़का दी है। यदि सरकार ने शीघ्र ही नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा (अनुकंपा नियुक्ति) पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था ठप होने की पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

क्या यही है ‘नया छत्तीसगढ़’? – एक तरफ नई तकनीक और अधोसंरचना पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मानव संसाधन (Human Resource) भूखा और असुरक्षित है। NHM कर्मचारी संघ का यह आक्रोश केवल वेतन की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई है।

अंतिम सवाल : मुख्यमंत्री जी, क्या आपके ‘संकल्प’ में इन 17,500 परिवारों के चूल्हे की आग शामिल नहीं है?

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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