सरकारी फंड के ‘खेल’ पर RTI की चोट : जशपुर शिक्षा विभाग में मची खलबली, 8 साल का हिसाब तलब…

पत्थलगांव। सरकारी स्कूलों में विकास और जनभागीदारी के नाम पर आने वाले पैसों का हिसाब अब सार्वजनिक होने वाला है। पत्रकार ने इंदिरा गांधी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पत्थलगांव में होने वाले वित्तीय लेन-देन को लेकर सूचना का अधिकार (RTI) के तहत विभाग की घेराबंदी कर दी है। इस आवेदन के बाद जिला शिक्षा कार्यालय से लेकर स्कूल प्रबंधन तक में हड़कंप मचा हुआ है।

8 सालों का ‘कच्चा चिट्ठा’ मांगकर उड़ाई नींद : आवेदक ने केवल सतही जानकारी नहीं, बल्कि साल 2018 से लेकर अब तक के हर एक पैसे का हिसाब माँगा है। इसमें शासन से प्राप्त राशि, विकास निधि, और जनभागीदारी मद की विस्तृत जानकारी शामिल है। RTI में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों की मांग की गई है :
- रोकड़ बही (Cash Book), लेजर और बैंक स्टेटमेंट की प्रमाणित प्रतियां।
- व्यय से संबंधित सभी बिल और वाउचर।
- 5000 रुपये से अधिक की खरीदी के लिए अपनाई गई प्रक्रिया (कोटेशन और तुलनात्मक पत्रक)।
- स्टॉक रजिस्टर, उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) और ऑडिट रिपोर्ट।
विभाग की सख्ती : “देरी हुई तो देना होगा ₹250 प्रतिदिन जुर्माना” – मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की जनसूचना अधिकारी श्रीमती सरोज खलखो ने धारा 6(3) के तहत आवेदन को मूलतः पत्थलगांव प्राचार्य को हस्तांतरित कर दिया है। विभाग ने कड़े लहजे में निर्देश दिया है कि जानकारी समय सीमा के भीतर दी जाए। यदि इसमें देरी होती है, तो राज्य सूचना आयोग के समक्ष जवाबदेही स्कूल प्रबंधन की होगी और 250 रुपये प्रतिदिन की दर से विलंब शुल्क भी अधिकारियों को अपनी जेब से भरना पड़ सकता है।
RTI के साथ ‘कानूनी हथौड़ा’ भी तैयार – आवेदक ने अपने आवेदन में स्पष्ट चेतावनी दी है कि सूचना छिपाने या भ्रामक जानकारी देने को RTI की धारा 20 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) की धारा 198 व 240 के तहत ‘आपराधिक कृत्य’ माना जाएगा।
बड़ा सवाल: क्या स्कूल प्रबंधन पिछले 8 वर्षों के आय-व्यय का पारदर्शी हिसाब दे पाएगा? या फिर स्टॉक रजिस्टर और ऑडिट रिपोर्ट की परतों के नीचे कुछ और ही राज दफन हैं?
फिलहाल, आवेदन PIO के पास लंबित है और विभाग ने जवाब पेश करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है।
पूर्व में प्रकाशित खबर :




