विशेष रिपोर्ट : घरघोड़ा में खाकी का इकबाल या ‘सेटिंग’ का मायाजाल?…

• रायगढ़ के नए कप्तान शशिमोहन सिंह के सामने ‘घरघोड़ा’ सबसे बड़ी चुनौती; क्या टूटेगा अवैध कारोबारियों का सिंडिकेट?…
रायगढ़। रायगढ़ जिले की कमान अब नए पुलिस अधीक्षक (SP) शशिमोहन सिंह के हाथों में है। कप्तानी बदलते ही सड़कों पर चर्चा शुरू हो गई है, लेकिन यह चर्चा स्वागत से ज्यादा शिकायतों और उम्मीदों की है। सबसे बड़ा सवाल औद्योगिक क्षेत्र घरघोड़ा को लेकर खड़ा है: क्या नया नेतृत्व घरघोड़ा की फिजा बदलेगा या पुरानी ‘सेटिंग’ का खेल बदस्तूर जारी रहेगा?
अपराध का ‘ओपन मार्केट’ : थाने के साये में फलते-फूलते काले धंधे – घरघोड़ा क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में अवैध कारोबार का ‘हब’ बन चुका है। विडंबना देखिए कि थाने से चंद कदमों की दूरी पर सट्टे की पर्चियां कटती हैं और रात के अंधेरे में डीजल चोर सक्रिय हो जाते हैं।
- डीजल और कबाड़ माफिया : गाड़ियों से तेल चोरी और अवैध कबाड़ का धंधा यहाँ की पहचान बन चुका है।
- रेत तस्करी : नियमों को ताक पर रखकर रेत का अवैध परिवहन धड़ल्ले से जारी है।
- खौफ में जनता : आम नागरिक अब अपनी गाड़ियां और दुकानें सुरक्षित नहीं मानते। अपराधियों में पुलिस का खौफ ‘शून्य’ नजर आता है।
सिस्टम का ‘स्थायी’ चेहरा : बरसों से जमे पुलिसकर्मी और संरक्षण का शक – घरघोड़ा थाने की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा दाग वहां वर्षों से पदस्थ कुछ ‘खास’ पुलिसकर्मी हैं। स्थानीय गलियारों में यह चर्चा आम है कि इन कर्मचारियों की “स्थायी पोस्टिंग” ही अवैध कारोबारियों के लिए अभयदान बनी हुई है।
सवाल यह है: क्या नए SP इन ‘पुराने चेहरों’ पर ट्रांसफर का हथौड़ा चलाएंगे? क्या उस नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा जो अपराधियों और खाकी के बीच सेतु का काम कर रहा है?
जनता की मांग : फोटोसेशन नहीं, कड़क एक्शन चाहिए – घरघोड़ा की जनता अब पुलिसिया बैठकों और कागजी निरीक्षणों से ऊब चुकी है। क्षेत्र को अब ठोस कार्रवाई की दरकार है :
- अवैध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी।
- माफियाओं के सरपरस्तों की पहचान और गिरफ्तारी।
- लंबे समय से जमे पुलिसकर्मियों का तत्काल फेरबदल।
साख की लड़ाई में नए कप्तान : नए SP शशिमोहन सिंह के लिए घरघोड़ा केवल एक थाना क्षेत्र नहीं, बल्कि उनकी ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की अग्निपरीक्षा है। अगर अपराधी जेल जाते हैं और व्यवस्था सुधरती है, तो जनता का पुलिस पर भरोसा लौटेगा। वरना, यह धारणा पुख्ता हो जाएगी कि –“केवल चेहरा बदला है, चरित्र नहीं।”
अब देखना दिलचस्प होगा कि घरघोड़ा में कानून का राज स्थापित होता है या फिर अपराधियों का दबदबा बरकरार रहता है।
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