रायगढ़

रायगढ़ : फ्लाइऐश के अवैध डंपिंग से ‘जहरीली’ हुई फिजा; नियमों को ताक पर रख खेतों और जंगलों को बनाया जा रहा निशाना…

रायगढ़।जशपुर- हैप्पी भाटिया। जिले के गेरवानी, सरायपाली और गदगांव क्षेत्र में फ्लाइऐश (राखड़) परिवहन के नाम पर ठेकेदारों की मनमानी और पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला गरमाया हुआ है। औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निपटान के दावों के बीच, ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चंद रुपयों के मुनाफे के लिए किसानों की उपजाऊ जमीन और सुरक्षित वन क्षेत्रों को ‘डस्टबिन’ में बदला जा रहा है।

NGT के नियमों की सरेआम धज्जियां – ग्रामीणों और स्थानीय किसानों द्वारा प्रशासन को सौंपी गई शिकायत के अनुसार, फ्लाइऐश परिवहन में लगे ठेकेदार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों को ठेंगे पर रख रहे हैं। शिकायत की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • अवैध डंपिंग साइट्स : जिन स्थानों के लिए आधिकारिक अनुमति मिली थी, उन्हें छोड़कर ठेकेदार अपनी सुविधानुसार कहीं भी राखड़ पलट रहे हैं।
  • कृषि भूमि पर संकट : निजी जमीनों और उपजाऊ खेतों के पास फ्लाइऐश डंप किए जाने से मिट्टी की उर्वरता और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
  • जंगलों पर कब्जा : आरोप है कि वन क्षेत्र के भीतर बिना किसी वैधानिक अनुमति के रास्ते बना लिए गए हैं, ताकि भारी वाहनों का बेरोकटोक आवागमन हो सके।

प्रशासनिक चुप्पी और ग्रामीणों का आक्रोश : क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ के उड़ते गुबार से सांस लेना दूभर हो गया है, लेकिन रसूखदार ठेकेदारों के आगे नियम बौने साबित हो रहे हैं। वन विभाग और पर्यावरण विभाग की नाक के नीचे जंगलों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है, जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

जांच का आश्वासन, कार्रवाई का इंतजार – मामला तूल पकड़ने के बाद पर्यावरण विभाग अब हरकत में आता दिख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि :

​”शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि निर्धारित स्थलों के अतिरिक्त कहीं भी डंपिंग पाई जाती है या एनजीटी के नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित फर्म और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

हमारा नजरिया : क्या जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होगी या उन ठेकेदारों पर नकेल कसी जाएगी जो रायगढ़ की आबोहवा को जहरीला बना रहे हैं? यह देखना अब जिला प्रशासन और पर्यावरण मंडल की निष्पक्षता पर निर्भर करता है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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