जूटमिल हत्याकांड में आरोपी दीपक यादव को आजीवन कारावास ; न्यायालय ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, नई भारतीय न्याय संहिता के तहत रायगढ़ की पहली बड़ी सजा…

रायगढ़, 7 नवंबर 2025। रायगढ़ जिले के बहुचर्चित जूटमिल हत्याकांड में आज माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जितेंद्र जैन के न्यायालय ने आरोपी दीपक उर्फ प्रकाश यादव (पिता स्व. मिलाऊ राम यादव, उम्र 42 वर्ष, निवासी बाजीराव मोदहापारा, थाना जूटमिल) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 103, 309(6), 331(7) एवं 238 के अंतर्गत हत्या एवं गृह-भेदन के अपराध में दोषसिद्ध पाया।
मामले की पृष्ठभूमि : दिनांक 26 सितंबर 2024 की सुबह जूटमिल क्षेत्र के बाजीराव पारा स्थित गंधरी पुलिया के पास रहने वाले 62 वर्षीय रमेश तिवारी उर्फ बब्बू महाराज का शव उनके ही घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। प्रारंभिक जांच में यह मामला ब्लाइंड मर्डर प्रतीत हुआ, परंतु पुलिस अधीक्षक दिव्यांग कुमार पटेल के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश मरकाम और दो डीएसपी सहित लगभग 30 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम गठित की गई, जिसने 72 घंटे के भीतर हत्या की गुत्थी सुलझा ली।
आरोपी का कबूलनामा : गिरफ्तारी के पश्चात आरोपी दीपक यादव ने अपने मेमोरेंडम बयान में स्वीकार किया कि वह रुपए चोरी करने की नीयत से घर में घुसा था, परंतु पकड़े जाने के भय से उसने बब्बू महाराज की हत्या कर दी। जांच टीम ने पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में फॉरेंसिक साक्ष्य, गवाहों के बयान एवं भौतिक प्रमाणों की श्रृंखला तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत की, जिसे अदालत ने अखंड, तार्किक और प्रमाणिक माना।
प्रभावी विवेचना और अभियोजन : मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मोहन भारद्वाज द्वारा की गई थी, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक श्री पी.एन. गुप्ता ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। प्रस्तुत साक्ष्यों और तार्किक तर्क-वितर्क के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया।
पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग कुमार पटेल ने कहा –
“रायगढ़ पुलिस का उद्देश्य गंभीर अपराधों की त्वरित एवं प्रभावी विवेचना कर दोषियों को कठोर सजा दिलाना है। नई भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक निर्णय के रूप में दर्ज होगा, जिससे अपराधियों में कानून का भय तथा जनता में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।”
न्यायिक प्रक्रिया में मील का पत्थर : यह फैसला न केवल एक संवेदनशील हत्या प्रकरण का निष्कर्ष है, बल्कि नई भारतीय न्याय संहिता के तहत रायगढ़ जिले का पहला बड़ा फैसला भी है, जिसने न्यायिक इतिहास में एक नई मिसाल कायम की है।




