चिकित्सकीय मर्यादा कलंकित : इलाज के बहाने महिला से छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को दो साल की कठोर सजा

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले से चिकित्सा जगत को शर्मसार कर देने वाला एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले में साइटिका का इलाज कराने आई एक महिला मरीज के साथ क्लिनिक के भीतर अभद्र व्यवहार और लैंगिक उत्पीड़न करने के दोषी पाए गए आरोपी को न्यायालय ने कड़ा दंड दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) बालोद, ताजुद्दीन आसिफ की अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दोषी करार देते हुए दो साल के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह घटना 14 अगस्त 2026 की है। पीड़िता अपनी साइटिका बीमारी के इलाज के लिए आरोपी हेमशंकर साहू (32 वर्ष, निवासी- भरदाकला) के पास पहुँची थी। दोपहर करीब 2:00 बजे आरोपी ने उसे परीक्षण के लिए अपने चैंबर में बुलाया, जहां पीड़िता के साथ हरीश तिवारी भी अंदर गए थे।
जब पीड़िता अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में डॉक्टर को बता रही थी, तभी आरोपी ने चालाकी से साथ आए व्यक्ति हरीश तिवारी को बाहर जाने के लिए कह दिया। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता को स्टूल पर बैठने को कहा और धीरे-धीरे उसका हाथ व बांह पकड़कर उसके शरीर के निजी अंगों को छूना शुरू कर दिया। हद तो तब पार हो गई जब आरोपी ने जांच के बहाने पीड़िता को उसके ब्लाउज का एक बटन खोलने को कहा और उसे अंदरूनी कमरे में चलने का दबाव बनाया।

पीड़िता द्वारा हरीश तिवारी को अंदर बुलाने की मांग करने पर आरोपी ने उसकी बेइज्जती करने की नीयत से अश्लील हरकतें कीं। खुद को घिरता देख पीड़िता ने हिम्मत जुटाई और आरोपी को धक्का देकर दरवाजा खोलने का प्रयास किया। दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण जब वह नहीं खुला, तो उसने घबराकर दरवाजा खटखटाना शुरू कर दिया। बाहर खड़े हरीश तिवारी और ड्राइवर पुष्पक पटेल ने जब अंदर से आती आवाजें सुनीं, तो उन्होंने तुरंत मौके पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाया।
त्वरित पुलिस कार्यवाही और न्याय प्रक्रिया
घटना के तुरंत बाद, 14 अगस्त 2026 को ही पीड़िता ने थाना बालोद में उपस्थित होकर आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 और 75(2) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की।
इस पूरे प्रकरण की संपूर्ण और निष्पक्ष विवेचना प्रधान आरक्षक (131) नर्मदा कोठारी द्वारा की गई। पुलिस ने त्वरित अनुसंधान करते हुए मात्र कुछ ही दिनों के भीतर 27 अगस्त 2026 को माननीय न्यायालय में अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले की मजबूत पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक सनद कुमार श्रीवास्तव ने की।
अदालत का फैसला और क्षतिपूर्ति के निर्देश। मामले की सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ताजुद्दीन आसिफ की अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित दंड से दंडित किया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 के तहत: 02 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10,000/- रुपये का अर्थदंड। भारतीय न्याय संहिता की धारा 75 के तहत: 01 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000/- रुपये का अर्थदंड।
इसके अलावा, अदालत ने पीड़िता को न्याय और संबल प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। नियमानुसार जांचोपरांत, आदेश प्राप्ति के दो माह के भीतर ‘पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018’ के तहत पीड़िता को पर्याप्त प्रतिकर (मुआवजा) दिलाने के लिए सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद को निर्देशित किया गया है।
इस संवेदनशील मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने एक कड़ा संदेश दिया है। न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि चिकित्सक का पेशा समाज में विश्वास, सेवा, संवेदना और नैतिकता का प्रतीक माना जाता है। एक मरीज, विशेषकर महिला, जब चिकित्सक के पास जाती है, तो वह उसकी निष्ठा पर पूर्ण विश्वास करती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उस विश्वास का दुरुपयोग कर महिला के साथ लैंगिक उत्पीड़न किया जाना न केवल महिला की गरिमा का हनन है, बल्कि चिकित्सीय पेशे के प्रति लोगों की अगाध आस्था पर एक बड़ा आघात है।




