छत्तीसगढ़ में नर्सेस का बगावती बिगुल! ग्रेड पे पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ आर-पार की जंग, दीपावली के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान…

- 8 साल से फाइलों में दफन कमेटी की सिफारिशें, बार-बार आंदोलन के बावजूद नहीं मिला न्याय! 30 अक्टूबर को रायपुर में हजारों नर्सिंग कर्मचारियों का हुंकार प्रदर्शन, सरकार को दो टूक चेतावनी – अब आश्वासन नहीं, चाहिए ठोस फैसला।…
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। वर्षों से लंबित ग्रेड पे बढ़ाने की मांग पर शासन की कथित उदासीनता से नाराज नर्सिंग संवर्ग ने अब निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। प्रदेशभर की नर्सेस ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 30 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में हजारों नर्सिंग कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि अब आंदोलन केवल ज्ञापन और विरोध तक सीमित रहने वाला नहीं है। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि दीपावली तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
राजधानी में उमड़ा नर्सिंग कर्मचारियों का सैलाब, सरकार तक पहुंचाई अपनी आवाज – 30 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से हजारों नर्सिंग कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर राजधानी रायपुर पहुंचे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल और मानसिक रोग चिकित्सालयों में कार्यरत नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।
पूरे दिन राजधानी में नारेबाजी और विरोध का दौर चलता रहा। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन से वर्षों पुरानी मांग पर तत्काल निर्णय लेने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए।
2018 में कमेटी बनी, सिफारिश भी हुई, फिर आठ साल से कार्रवाई क्यों नहीं? – नर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि ग्रेड पे बढ़ाने की मांग आज भी अधर में लटकी हुई है, जबकि इस मुद्दे पर वर्ष 2018 में आंदोलन के बाद सरकार ने कमेटी का गठन किया था।
संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुमन शर्मा के अनुसार, वर्ष 2018 के आंदोलन के बाद गठित कमेटी ने नर्सिंग कर्मचारियों का ग्रेड पे बढ़ाने की अनुशंसा की थी। लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि आठ साल बीत जाने के बावजूद उन सिफारिशों पर अमल नहीं हुआ।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब कमेटी ने अपनी अनुशंसा दे दी थी, तो फिर उसे लागू करने में इतनी देरी क्यों? क्या सरकारी फाइलों में कर्मचारियों के अधिकारों की मांगें इसी तरह वर्षों तक दबी रहेंगी? आखिर नर्सिंग कर्मचारियों को अपने हक के लिए बार-बार आंदोलन की राह क्यों पकड़नी पड़ रही है?
2023 के आंदोलन की कार्रवाई आज भी कर्मचारियों के जेहन में – नर्सिंग कर्मचारियों का आक्रोश वर्ष 2023 के आंदोलन से जुड़ी घटनाओं के कारण भी गहरा है। छत्तीसगढ़ हेल्थ फेडरेशन के बैनर तले हुए आंदोलन के दौरान लगभग 2500 से अधिक कर्मचारियों को निलंबन और बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।
इसके बावजूद कर्मचारियों की मूल मांग का समाधान नहीं हो सका। लगातार पत्राचार, अधिकारियों से मुलाकात और मौखिक निवेदन के बाद भी कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती गई। अब संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्षों से लंबित मांग को लेकर निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
सात अक्टूबर से शुरू हुआ विरोध, 30 अक्टूबर को शक्ति प्रदर्शन; अब अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी – सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है।
7 अक्टूबर: प्रदेशभर के स्वास्थ्य संस्थानों में भोजन अवकाश के दौरान प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
30 अक्टूबर: प्रदेशभर के नर्सिंग कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर राजधानी रायपुर में विशाल सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया और शासन को अपनी एकजुटता का संदेश दिया।
दीपावली तक अंतिम चेतावनी: संघ ने साफ कर दिया है कि यदि दीपावली तक ग्रेड पे बढ़ाने की मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसके बाद अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
हड़ताल हुई तो अस्पतालों की व्यवस्था पर पड़ेगा असर, मरीजों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें – नर्सिंग कर्मचारी किसी भी अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। मरीजों की देखभाल से लेकर उपचार में सहयोग, दवाइयों के प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं तक उनकी भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे में यदि प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है, तो सरकारी अस्पतालों की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
इसका सबसे अधिक खामियाजा उन मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ सकता है, जो इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित संकट को देखते हुए अब शासन-प्रशासन के सामने समय रहते समाधान निकालने की चुनौती है।
नर्सेस का सरकार से दो टूक सवाल – आखिर कब मिलेगा वर्षों पुरानी मांग का जवाब? : छत्तीसगढ़ प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और अनिश्चितकालीन आंदोलन की स्थिति बनी, तो उससे उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
संघ ने सरकार से संवेदनशीलता दिखाने और वर्षों से लंबित ग्रेड पे वृद्धि की मांग पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
अब सरकार के सामने फैसला लेने की घड़ी है। एक तरफ वर्षों से अपने वेतनमान में सुधार की मांग कर रहे हजारों नर्सिंग कर्मचारी हैं, तो दूसरी तरफ प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था है, जिस पर संभावित हड़ताल का सीधा असर पड़ सकता है। 30 अक्टूबर का रायपुर प्रदर्शन सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी बनकर सामने आया है। अब देखना यह है कि सरकार दीपावली से पहले बातचीत और निर्णय का रास्ता अपनाती है या फिर प्रदेश को एक और बड़े कर्मचारी आंदोलन का सामना करना पड़ेगा।
नर्सिंग कर्मचारियों का संदेश साफ है – वर्षों का इंतजार अब और नहीं, मांगों पर फैसला चाहिए।




