शिक्षा के अधिकार पर संकट : बालोद के दो दिव्यांग छात्र चाह रहे ठोस सहायता

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/गुरूर। जिले के गुरूर विकासखंड के पेंवरो संकुल के हाई स्कूल में पढ़ने वाले दो सगे भाई — कुणाल और चेतक — मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी जटिल बीमारी से जूझ रहे हैं। परिवार की आर्थिक तंगी और परिवहन की अनुपलब्धता के कारण दोनों की हायर सेकेंडरी शिक्षा संकट में आ गयी है। घर के निकट ट्रायसाइकिल पर स्कूल जाने का सहारा अब पाँच किलोमीटर दूर स्कूल जाने पर असफल साबित हो रहा है, जिससे माता-पिता दोनों बच्चों की देखभाल और आजीविका के बीच फँस गए हैं।

बालोद जिले के पेंवरो गांव में रहने वाले कुणाल (17 वर्ष) और चेतक (16 वर्ष) की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी और पढ़ाई मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक अनूठी बीमारी से प्रभावित है, जिससे दोनों अपने पैरों पर खड़े होना या बैठना भी सक्षम नहीं रह गए हैं। उनके माता-पिता हेमंत कुमार और शैलेन्द्री साहू ने बताया कि अब तक प्रशासन द्वारा दिए गए ट्रायसाइकिल ने निकटवर्ती स्कूल तक आने-जाने में मदद की, लेकिन उच्च माध्यमिक (11वीं – 12वीं) की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव का स्कूल 5 किलोमीटर दूर होने से यह साधन अपर्याप्त साबित हो रहा है।

बच्चों की शारीरिक सीमाओं के चलते उन्हें शौचालय जाने और दैनिक गतिविधियों में भी पूर्ण देखभाल की आवश्यकता होती है, इसलिए पूरे दिन घर में किसी एक अभिभावक का होना अनिवार्य है। परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य हेमंत मजदूरी पर निर्भर है और रोज़गार छोड़कर घर पर बैठने की स्थिति में परिवार की आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी। परिवार वर्तमान में अतिसंवेदनशील स्थिति से जूझ रहा है — बच्चों की शिक्षा बचाने हेतु परिवहन और विशेष देखभाल की व्यवस्था की मांग के साथ साथ रोज़ी-रोटी की चिंता भी लगातार बढ़ रही है। आपको बता दें कि आयुर्वेद में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का सही नाम “मंसागत वात” है। यह वातव्यधि का एक प्रकार है, जो न्यूरोमस्कुलर रोगों से संबंधित है।
हेमंत ने बताया कि वे जिला कलेक्टर और प्रदेश के मुखिया तक बार-बार गुहार लगा चुके हैं, परन्तु अभी तक केवल मौखिक आश्वासन ही मिला है; कोई ठोस सहायता नहीं दी गई। स्थानीय स्कूल प्रशासन का कहना है कि विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों के लिए समुचित इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिवहन की व्यवस्था आवश्यक है, पर संसाधनों की कमी अड़चन बन रही है।
विधिक और सामाजिक संगठनों के माध्यम से समस्या का स्थायी समाधान निकल सके, यह परिवार की आशा है। स्थानीय अधिकारियों से अपील की जा रही है कि तुरन्त इकट्ठा परिवहन, घरेलू देखभाल सहायता या पास के विद्यालय में समायोजन की व्यवस्था की जाए, ताकि कुणाल और चेतक अपनी पढ़ाई बिना बाधा जारी रख सकें और परिवार को अनिश्चित आर्थिक संकट से राहत मिल सके।




