जनता के आक्रोश के आगे झुका प्रशासन: भालूनारा-रॉबर्ट्सन सड़क निर्माण के लिए 1 अक्टूबर की डेडलाइन तय, लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म…

रायगढ़ । गड्ढों में तब्दील हो चुकी भालूनारा-रॉबर्ट्सन सड़क को लेकर ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। चार दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरने और भारी जनविरोध के आगे प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। ग्रामीणों की दो टूक मांग—”मरम्मत नहीं, पक्का निर्माण चाहिए”—के आगे प्रशासन ने घुटने टेकते हुए 1 अक्टूबर से सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का लिखित आश्वासन सौंपा, जिसके बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित किया।
मरम्मत का झुनझुना ग्रामीणों ने नकारा – गुरुवार को नवागांव सड़क पर आंदोलन के चौथे दिन माहौल उस वक्त गरमा गया, जब 6 से 7 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर चक्काजाम की तैयारी शुरू कर दी। प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर गड्ढों को पाटने और लीपापोती की कोशिश की, जिसे ग्रामीणों ने सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस द्वारा कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बावजूद ग्रामीण सड़क पर डटे रहे और जमकर नारेबाजी की।
आधे दर्जन से ज्यादा गांव झेल रहे बदहाली का दंश – जर्जर सड़क के कारण रोजाना आवागमन नारकीय बन चुका है। इस मार्ग की बदहाली से आधा दर्जन से अधिक गांव सीधे तौर पर प्रभावित हैं:
- भालूनारा
- रॉबर्ट्सन
- नवागांव
- पामगढ़
- रजघट्टा
- छोटे डूमरपाली और बड़े डूमरपाली
विधायक के हस्तक्षेप के बाद लिखित गारंटी – आंदोलन के चरम पर खरसिया विधायक उमेश पटेल भी ग्रामीणों के समर्थन में मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी में एसडीएम से कड़े लहजे में बात की। मैराथन चर्चा और ग्रामीणों के कड़े रुख के बाद एसडीएम ने 1 अक्टूबर से निर्माण कार्य शुरू कराने का लिखित आदेश सौंपा।
लिखित आदेश मिलने के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की, लेकिन साथ ही साफ चेतावनी दी कि यदि 1 अक्टूबर को तय समय सीमा पर काम शुरू नहीं हुआ, तो इस बार आंदोलन और अधिक उग्र होगा।




