RTI कानून पर भारी अफसरशाही की मनमानी : लोक निर्माण विभाग (सेतु मंडल) रायगढ़ में धारा 6(3) की सरेआम धज्जियां, पल्ला झाड़कर बंद की जनहित की फाइल…

विशेष संवाददाता | रायगढ़
शासन और प्रशासन में पारदर्शिता स्थापित करने के उद्देश्य से संसद द्वारा पारित ‘सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005’ लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण मंडल), रायगढ़ के अफसरों की टेबल पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। न्यायालयीन मामलों और जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जानकारी देने के बजाय विभाग के जिम्मेदार अधिकारी न केवल नियमों को ताक पर रख रहे हैं, बल्कि आरटीआई कानून की मूल भावना का सरेआम मजाक बना रहे हैं।
ताजा मामला पत्रकार द्वारा दायर ऑनलाइन आरटीआई आवेदन (आईडी: 220260807001985) से जुड़ा है। घरघोड़ा कोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में चाही गई जानकारी पर अधीक्षण अभियंता कार्यालय ने जो गैर-जिम्मेदाराना रुख अपनाया है, उसने पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता और नीयत पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्र लिखकर झाड़ा पल्ला, ऑनलाइन पोर्टल पर कर दी इतिश्री – कार्यालय अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग, सेतु निर्माण मंडल, रायगढ़ द्वारा जारी पत्र क्रमांक 1315/स्था./सू.अ./2026-27 (दिनांक 10/08/2026) में अधीक्षण अभियंता एम. एल. उइके ने दो टूक शब्दों में पल्ला झाड़ते हुए लिखा:
“चूँकि आपके द्वारा चाही गई जानकारी कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग (भ./स.) रायगढ़ संभाग से संबंधित होने के कारण इस कार्यालय से इसकी जानकारी प्रदाय किया जाना संभव नहीं है।”
हैरानी की बात यह है कि इस पत्र के साथ ही ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल पर आवेदन की स्थिति को बिना किसी समाधान या कानूनी प्रक्रिया के ‘Completed’ दर्शाकर मामले को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
क्या कहता है कानून? धारा 6(3) का सीधा उल्लंघन – सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(3) बहुत स्पष्ट और बाध्यकारी है। यह धारा कहती है कि:
- यदि किसी लोक प्राधिकरण के पास ऐसा आवेदन आता है, जिसकी जानकारी किसी अन्य विभाग या लोक प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है, तो आवेदन प्राप्त करने वाले अधिकारी का यह कानूनी दायित्व है कि वह 5 दिनों के भीतर उस आवेदन को संबंधित विभाग को अंतरित (Transfer) करे।
- इसके साथ ही, आवेदनकर्ता को इसकी लिखित सूचना दी जाए कि उसका आवेदन संबंधित अधिकारी को भेज दिया गया है।
सेतु मंडल के अधीक्षण अभियंता को जब यह भली-भांति ज्ञात था कि जानकारी ‘कार्यपालन अभियंता, लोनिवि (भ./स.) संभाग रायगढ़’ के पास है, तो नियम अनुसार इस आवेदन को ऑनलाइन या डाक के माध्यम से वहां ट्रांसफर क्यों नहीं किया गया?
अज्ञानता या जानबूझकर सच छुपाने का खेल? – यह पूरा घटनाक्रम दो ही स्थितियों की ओर इशारा करता है—
- कानूनी अज्ञानता: जिले के सेतु मंडल का प्रभार संभाल रहे क्लास-वन स्तर के अधीक्षण अभियंता आरटीआई एक्ट की सबसे बुनियादी धारा 6(3) से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।
- सच्चाई छुपाने की मंशा: घरघोड़ा कोर्ट और विभाग से जुड़े संवेदनशील मामले को सार्वजनिक होने से बचाने के लिए जानबूझकर तकनीकी बहानों का सहारा लिया जा रहा है ताकि आवेदक भटकता रहे और जानकारी दब जाए।
जवाबदेही से भागते अफसर, उच्चाधिकारियों और आयोग के संज्ञान की दरकार -आरटीआई कानून आम जनता और मीडिया को जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, लेकिन सेतु मंडल रायगढ़ का यह रवैया सीधे तौर पर सूचना के प्रवाह को रोकने और आवेदकों को हतोत्साहित करने वाला है। नियम विरुद्ध तरीके से आवेदन को निरस्त/समाप्त करने के इस कृत्य पर क्या राज्य सूचना आयोग और शासन के वरिष्ठ अधिकारी संज्ञान लेकर संबंधित जन सूचना अधिकारी पर विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई करेंगे? यह सवाल अब प्रशासनिक गलियारों में गूंज रहा है।




