सड़क पर ‘खून’ से ख़त, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल : लद्दाख से बस्तर तक सुलगी सोनम वांगचुक और NEET पेपर लीक के विरोध की आग!…

रायपुर। देश के भावी कर्णधारों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। भ्रष्ट परीक्षा तंत्र, लगातार होते पेपर लीक और लोकतंत्र में उठने वाली आवाज़ों को कुचलने के रवैये के खिलाफ छत्तीसगढ़ के युवाओं ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलनरत सोनम वांगचुक के समर्थन तथा NEET पेपर लीक के विरोध में छत्तीसगढ़ की धरती पर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो गया है।
राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर NSUI समेत तमाम छात्र और सामाजिक संगठनों का जमावड़ा लगा हुआ है। विरोध का आलम यह है कि युवाओं ने तंत्र को जगाने के लिए अपने खून से ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ लिखकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
रायपुर में ‘खून’ से क्रांति : 5 युवा अनिश्चितकालीन हंगर स्ट्राइक पर… रायपुर का अंबेडकर चौक इस समय युवाओं के आक्रोश और बुलंद नारों का केंद्र बना हुआ है। केवल नारों और ज्ञापनों से जब बात नहीं बनी, तो आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष को और उग्र रूप दे दिया।
- खून से लिखा विरोध-पत्र : प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी उंगलियों से खून निकालकर पोस्टर पर ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ लिखा और संदेश दिया कि यह लड़ाई उनके अस्तित्व और आत्मसम्मान से जुड़ी है।
- 5 कार्यकर्ताओं का अनशन : तंत्र के सामने घुटने टेकने से इनकार करते हुए NSUI के 5 कार्यकर्ता—हेमंत पाल, अनुज शुक्ला, इंडिया घृतलहरे, ड्रिंकल और सोनम अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (हंगर स्ट्राइक) पर बैठ गए हैं।
- अटल इरादा : भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार शिक्षा तंत्र में सुधार और पेपर लीक पर कठोर कार्रवाई के लिखित कदम नहीं उठाती, तब तक उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा।
धमतरी से बीजापुर तक : प्रदेशभर में गूंजी वांगचुक के समर्थन की आवाज़ – लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण के लिए आमरण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक का समर्थन अब छत्तीसगढ़ के कोने-कोने तक पहुँच चुका है।
- धमतरी में गांधीवादी सत्याग्रह : धमतरी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सामाजिक कार्यकर्ता मितेश जैन ने सोनम वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय अनशन किया। अनशन स्थल पर बने ‘एक दिवसीय अनशन – सोनम वांगचुक के समर्थन में’ के बैनर ने शहर के नागरिकों का ध्यान खींचा और दिनभर आम लोगों का समर्थन जुटाने का काम किया।
- बस्तर के आदिवासियों का राष्ट्रपति को पत्र : बीजापुर में ‘बस्तर संभाग आदिवासी युवा छात्र संगठन’ ने सोनम वांगचुक की मांगों को लेकर मोर्चा संभाला। संगठन ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वांगचुक की जायज मांगों पर अविलंब सकारात्मक और संवेदनशील कदम उठाने की अपील की है।
जंतर-मंतर पर तानाशाही कार्रवाई का कड़ा विरोध – प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे सत्याग्रहियों और सोनम वांगचुक के समर्थकों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई की तीव्र भर्त्सना की। युवाओं का कहना था कि लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का मौलिक अधिकार है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाना तानाशाही मानसिकता का परिचय है, जिसे देश का युवा बर्दाश्त नहीं करेगा।
परीक्षा तंत्र में भ्रष्टाचार और छात्रों का दर्द : धरने पर बैठे प्रतियोगी परीक्षार्थियों और छात्रों ने शिक्षा प्रणाली की जर्जर स्थिति पर कई सवाल उठाए :
- समय और पैसों की बर्बादी : बार-बार पेपर लीक होने और परीक्षाएं रद्द होने से युवाओं के कई साल बर्बाद हो रहे हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र आर्थिक और मानसिक तनाव के शिकार हो रहे हैं।
- आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए : युवाओं ने साफ कहा कि अब सरकार की ओर से दिए जाने वाले खोखले ‘आश्वासनों’ का दौर खत्म हो चुका है। सरकार को परीक्षा तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाने के लिए ठोस ढांचा तैयार करना होगा।
- माफिया पर नकेल : पेपर लीक से जुड़े गिरोहों और अधिकारियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि दोबारा कोई युवाओं के भविष्य से खेलने की हिम्मत न कर सके।
प्रदर्शनकारियों की 6 प्रमुख और अंतिम मांगें :
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा : लगातार हो रही परीक्षा धांधलियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
- पेपर लीक पर बने कठोर कानून : देश स्तर पर पेपर लीक रोकने के लिए सख्त और गैर-जमानती धाराओं वाला कानून लागू किया जाए।
- पारदर्शी परीक्षा प्रणाली : सभी राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
- सोनम वांगचुक की मांगों का समाधान : लद्दाख की सुरक्षा, संविधान की छठी अनुसूची और वांगचुक की मांगों पर केंद्र सरकार अविलंब सकारात्मक फैसला ले।
- शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार : देश के शिक्षा बजट और रोजगार गारंटी नीतियों में युवाओं के हित में सुधार किए जाएं।
- लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान : शांतिपूर्ण आंदोलनों पर पुलिसिया दमन बंद हो और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा की जाए।
आगे की राह : आंदोलन और तेज होने की चेतावनी – रायपुर में आंदोलन के पहले ही दिन 500 से अधिक युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया था और जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था। अब 5 युवाओं की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बाद यह आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप ले चुका है।
NSUI और छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह सत्याग्रह छत्तीसगढ़ के हर जिले में फैलाया जाएगा।




