बिलासपुर में सनसनीखेज फर्जीवाड़ा : फांसी लगाकर की थी खुदकुशी, ‘सांप कटवाकर’ डकार गए सरकार का मुआवजा; 3 बाबू गिरफ्तार!…

बिलासपुर। न्यायधानी में सर्पदंश से हुई मौतों के नाम पर शासकीय मुआवजा राशि लूटने वाले गिरोह पर पुलिस का कड़ा प्रहार जारी है। फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर लाखों रुपये की आपदा राहत राशि डकारने के खेल में सरकंडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील और एसडीएम कार्यालय के तीन क्लर्कों (बाबुओं) को धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
इस गिरोह की परतें खुलने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिले में अब तक सर्पदंश के 15 फर्जी मामले बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने का भंडाफोड़ हो चुका है।
मूर्दों के नाम पर डाका : फांसी को बना दिया ‘सर्पदंश’ – जांच में जो बात सामने आई है, वह किसी के भी होश उड़ा दे :
- फांसी की मौत पर मुआवजा : सरकंडा क्षेत्र में एक व्यक्ति ने फांसी लगाकर खुदकुशी की थी। पुलिस ने मर्ग कायम कर केस बंद (खात्मा) भी कर दिया था।
- फर्जी फाइल का खेल : जालसाजों ने इसी बंद हो चुके मर्ग नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार कर लिए।
- अदृश्य मृतक : जिस नाम पर आपदा सहायता राशि निकाली गई, जब पुलिस उसकी तलाश में पहुंची तो पता चला कि उस नाम का कोई इंसान ही मौजूद नहीं था – यानी पूरा नाम और पहचान ही फर्जी थी!
कार्यालयों में बैठे ‘दीमक’ : इन तीन बाबुओं पर गाज – तहसील और एसडीएम दफ्तर में बैठकर सरकारी तिजोरी पर डाका डालने वाले इन तीन आरोपियों को पुलिस ने बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा है:
- हरिशंकर राठौर (तहसील कार्यालय का बाबू)
- नरेंद्र कौशिक (एसडीएम कार्यालय का बाबू)
- गरीब बिंझवार (शासकीय कर्मचारी/बाबू)
इन तीनों ने मिलकर फर्जी फाइलों को हरी झंडी दिखाई और कलेक्टोरेट में पेश कर सरकार की तरफ से मिलने वाली राहत राशि आपस में बांट ली।
कलेक्टर की जांच में खुला ’15 फर्जी मुकदमों’ का राज – जब कलेक्टोरेट तक शिकायतें पहुंचीं, तो कलेक्टर ने जिले भर में सर्पदंश के मामलों की री-ऑडिट (विशेष जांच) के आदेश दिए। जांच शुरू होते ही फर्जीवाड़े का पहाड़ निकल आया।
- जिले के अलग-अलग थानों में 15 एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं।
- इससे पहले तोरवा पुलिस ने इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए एक डॉक्टर और वकील समेत 5 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा था।
“फांसी के मर्ग नंबर पर फर्जी पीएम रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा हड़पने के मामले में तीन बाबुओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की तहकीकात जारी है और इसमें शामिल अन्य चेहरों को भी जल्द बेनकाब किया जाएगा।” – प्रदीप आर्य, थाना प्रभारी (सरकंडा)
आगे और भी नाम होंगे बेनकाब! – पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट ने कुल कितने लाख या करोड़ रुपये का चूना शासन को लगाया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग के कई और बड़े नाम इसमें उलझ सकते हैं।



