तांदुला नदी ड्रोन सर्वेक्षण : ग्राम देउरतराई से प्रारंभ किया जाएगा तांदुला नदी का सर्वेक्षण कार्य

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले की जीवनरेखा तांदुला नदी को स्वच्छ, संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। जिला प्रशासन और आईआईटी भिलाई की साझेदारी से नदी के सर्वेक्षण कार्य की शुरुआत हो रही है, जो भविष्य में इसे एक मजबूत पारिस्थितिक तंत्र के रूप में विकसित करने का आधार बनेगा। यह प्रयास न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा भी सुनिश्चित करेगा।

बालोद जिला प्रशासन ने जिले की प्रमुख नदी तांदुला के पुनरुद्धार के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस अभियान के तहत शुक्रवार, 15 मई को जिला मुख्यालय बालोद के निकटवर्ती ग्राम देउरतराई के मैदान से प्रातः 9 बजे यूएवी ड्रोन के जरिए नदी सर्वेक्षण का कार्य आरंभ होगा। यह सर्वेक्षण तांदुला नदी से हीरापुर एनीकट तक के पूरे क्षेत्र को कवर करेगा, जिससे नदी को पर्यावरण के अनुकूल और सुदृढ़ रूप प्रदान करने में मदद मिलेगी।

जिला प्रशासन और आईआईटी भिलाई के बीच हुए अनुबंध के अनुसार, ड्रोन प्रौद्योगिकी का उपयोग कर नदी के मौजूदा हालात का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इससे नदी तटों की स्थिति, जल प्रवाह, प्रदूषण स्तर और पारिस्थितिक संतुलन का सटीक डेटा संग्रहित होगा। प्राप्त जानकारी के आधार पर भविष्य में संतुलित जल प्रबंधन, स्वच्छता अभियान और पर्यावरणीय संरक्षण की रणनीतियां तैयार की जाएंगी। योजना का मुख्य उद्देश्य तांदुला को एक स्वच्छ, प्रदूषण-मुक्त और जैव विविधता से भरपूर नदी तंत्र के रूप में स्थापित करना है, जहां मछलियों, पक्षियों और अन्य जलचरों का प्राकृतिक निवास सुरक्षित रहे।

यह सर्वेक्षण नदी जीर्णोद्धार का पहला चरण है, जो स्थानीय किसानों, निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए राहत की सांस लेकर आएगा। तांदुला नदी जिले की कृषि और पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है, लेकिन अतीत में अवैध कटाई, कचरा निस्तारण और अनियोजित निर्माण से इसकी स्थिति खराब हुई है। ड्रोन सर्वे से इन समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान संभव होगा, जिसमें तटबंध मजबूती, वनरोपण और जलाशयों का संरक्षण शामिल है।
जिला कलेक्टर ने बताया कि यह परियोजना सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जो नदी को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भी सुरक्षित बनाएगी। सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जाएगा, ताकि समुदाय-आधारित संरक्षण सुनिश्चित हो। इस प्रयास से न केवल तांदुला नदी का स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर में वृद्धि और पारिस्थितिक संतुलन भी बहाल होगा।




