लोकतंत्र के ‘चौथे स्तंभ’ पर प्रहार : सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सवाल पूछने पर पत्रकार की पिटाई, सिस्टम के अहंकार ने पार की हदें, देखें लाइव वीडियो…

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और कलम की ताकत पर कुर्सी का नशा हावी हो जाए, तो समझ लीजिए कि व्यवस्था आईसीयू में है। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ से एक ऐसी शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यहाँ एक युवा पत्रकार को ‘सच’ और ‘सवाल’ पूछने की सजा मारपीट और बदसलूकी के रूप में मिली है।
क्या है पूरा मामला?– जानकारी के मुताबिक, युवा पत्रकार पोषराम साहू किसानों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए ‘किसान सम्मान निधि योजना’ में आ रही दिक्कतों को लेकर कृषि विस्तार अधिकारी के पास पहुँचे थे। पत्रकार का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने जनता की समस्याओं पर जवाब मांग लिया।
सत्ता की हनक : बताया जा रहा है कि सवालों की धार से तिलमिलाए अधिकारी ने अपनी मर्यादा की सीमा लांघ दी। बहस इतनी बढ़ी कि अधिकारी ने आपा खोते हुए पत्रकार के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि सरेआम मारपीट भी शुरू कर दी।
बचाने आए वकील को भी नहीं बख्शा – प्रशासनिक अहंकार का आलम यह था कि जब मौके पर मौजूद एक वकील ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करने की कोशिश की, तो अधिकारी ने उनके साथ भी हाथापाई की। यह घटना दर्शाती है कि अधिकारी के भीतर कानून का खौफ खत्म हो चुका है।
प्रशासनिक गुंडागर्दी के खिलाफ आक्रोश की ज्वाला – इस घटना के बाद जिले भर के पत्रकारों और सामाजिक संगठनों में भारी उबाल है। स्थानीय पत्रकार संगठनों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है:
- दोषी पर तत्काल एक्शन : आरोपी अधिकारी को तुरंत निलंबित कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- अभिव्यक्ति की सुरक्षा : अगर सवाल पूछने पर ही मारपीट होगी, तो लोकतंत्र का अस्तित्व कैसे बचेगा?
- विपक्ष का हमला : विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे ‘जंगलराज’ की आहट बताया है।
बड़ा सवाल : क्या न्याय मिलेगा? – फिलहाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन सवाल वही खड़ा है— क्या एक आम पत्रकार को रसूखदार अधिकारियों के खिलाफ न्याय मिल पाएगा? या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
संपादकीय टिप्पणी : एक पत्रकार का काम सवाल पूछना है, और एक लोक सेवक का धर्म जवाब देना। जब जवाब की जगह हाथ-पैर चलने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ की यह घटना पूरे प्रदेश के प्रशासन पर एक काला धब्बा है।




