रायगढ़

तमनार में ‘सूखा’ या सुशासन का नया प्रयोग? बंद पड़ी शराब भट्टी ने बढ़ाया ‘पियक्कड़ों’ का बीपी!…

तमनार : रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में इन दिनों ‘मधुशाला’ के शौकीनों के बीच हाहाकार मचा हुआ है। विष्णुदेव साय सरकार के तथाकथित सुशासन में जहाँ विकास की गंगा बहने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं तमनार की देसी शराब भट्टी पर ताला लटकने से ‘जाम’ के शौकीन बेहाल नजर आ रहे हैं।

भट्टी पर ताला, शौकीन बेबस : पिछले कुछ समय से क्षेत्र की देसी शराब भट्टी बंद पड़ी है। आलम यह है कि जो लोग शाम को अपनी थकान मिटाने भट्टी का रुख करते थे, उन्हें अब खाली हाथ और सूखे हलक के साथ वापस लौटना पड़ रहा है। सुशासन की इस व्यवस्था में पीने वालों की बेचैनी अब आक्रोश में बदलने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर व्यवस्था सुचारु नहीं करनी थी।

साहब के पास ‘फुर्सत’ नहीं, फोन बजता रहा अनसुना – हैरानी की बात तो यह है कि इस अव्यवस्था पर जब जवाबदेह अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो सुशासन की असल तस्वीर सामने आ गई। क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी ने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। बार-बार बजती फोन की घंटी इस बात का प्रमाण है कि सत्ता और शासन के गलियारों में बैठे जिम्मेदारों को जनता (या उपभोक्ताओं) की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है।

बड़ा सवाल : क्या अधिकारियों की यह चुप्पी किसी बड़ी लापरवाही का हिस्सा है, या फिर ‘सुशासन’ के नाम पर जमीनी हकीकत से मुंह मोड़ने का नया तरीका?

अवैध कारोबार को मिल रही हवा? – जानकारों का मानना है कि सरकारी भट्टी बंद होने से क्षेत्र में कोचियों (अवैध शराब विक्रेताओं) के हौसले बुलंद हो सकते हैं। जब सरकारी दरवाजा बंद मिलता है, तो लोग अक्सर दो नंबर के रास्तों की तलाश करते हैं, जिससे शासन को राजस्व की हानि तो होती ही है, साथ ही जहरीली शराब का खतरा भी बढ़ जाता है।

अब देखना यह होगा कि क्या कुंभकर्णी नींद में सोए विभाग के आला अधिकारी तमनार की इस समस्या पर संज्ञान लेते हैं, या फिर ‘सुशासन’ का यह मौन ऐसे ही बरकरार रहेगा?

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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